प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक चुनौतियों को अवसर में बदलने की दूसरे पैकेज की तैयारी.

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नई दिल्ली। कोविड-19 ने देश के समक्ष अप्रत्याशित आर्थिक चुनौतियां पेश की हैं और माना जा रहा है कि इससे निपटने के लिए सरकार की तरफ से घोषित होने वाला दूसरा पैकेज भी कुछ ऐसा ही होगा। शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी की गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मौजूदा महामारी से बुरी तरह से प्रभावित आर्थिक क्षेत्रों की दशा पर हुए विमर्श से कुछ ऐसा ही संकेत मिलता है।

कोरोना महामारी से उपजी चुनौतियों को लेकर हुई बैठक

वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में चुनौतियों के साथ ही कोरोना महामारी से बने वैश्विक माहौल में उपजे अवसरों पर भी चर्चा हुई है। ऐसे में भावी पैकेज एक तरफ जहां घरेलू मांग को लेकर उपजी चिंताओं का निवारण करेगा वहीं भारतीय उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी बनाने में भी मददगार साबित होगा।

पिछले तीन दिनों में हर बड़े सेक्टर पर पीएम मोदी कर चुके हैं चर्चा

शनिवार को पीएम ने कृषि क्षेत्र और छोटे व मझोले उद्योग सेक्टर पर अलग से बैठक बुलाई थी। इसके पहले शुक्रवार को उन्हें गृह मंत्री, वित्त मंत्री के साथ बिजली मंत्री, श्रम मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री के साथ अलग-अलग बैठक भी की थी। उसके पहले यानी गुरुवार को देश में निवेश के माहौल को सुधारने और भारत को देशी व विदेशी निवेशकों का पसंदीदा स्थल बनाने के उपायों पर भी पीएम ने एक बैठक की थी। इस तरह से पिछले तीन दिनों में उन सभी सेक्टरों पर मंत्रालयवार मशविरा हो चुका है जिन पर कोविड-19 की वजह से सबसे ज्यादा चुनौतियां पैदा हुई है।

 

हर सेक्टर के मंत्रालय की तरफ से एक-एक प्रेजेंटेशन दिया गया है। जिस पर नीति आयोग के विशेषज्ञों का समूह अलग से विमर्श कर रहा है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि नया पैकेज पिछले महीने वित्त मंत्री की तरफ से घोषित 1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज से हर लिहाज से भिन्न होगा। इसका लक्ष्य सिर्फ मौजूदा मांग की कमी को दूर कर आर्थिक विकास दर की रफ्तार बढ़ाना भर नहीं होगा बल्कि भारतीय इकोनोमी की समस्याओं का बहुआयामी समाधान निकालने पर जोर होगा।

 

सूत्रों का कहना है कि उक्त बैठकों में लॉकडाउन से प्रभावित इकोनोमी के लिए मध्यावधि और दीर्घावधि प्लानिंग के विकल्पों पर कई सुझावों पर विमर्श किया गया है। भावी पैकेज को अंतिम रुप देने से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलावों को भी ध्यान रखा जाएगा। इस संदर्भ में कई देशों में स्थित भारतीय मिशनों ने भी अपनी अपनी रिपोर्ट विदेश मंत्रालय के जरिए सरकार तक भिजवाई है।

 

ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका, जापान, यूरोप की कंपनियों के बीच नए वैश्विक मैन्यूफैक्चरिंग स्थल की तलाश तेज होगी। ऐसे में भारत के पास मौका है कि इन देशों की कंपनियों को अपने यहां आकर्षित कर सके। माना जा रहा है कि भारत की इस बारे में जापान व अमेरिका जैसे देशों के साथ वार्तालाप भी हो रहा है ताकि कुछ देशों का अपना स्पेशल सप्लाई चेन विकसित हो सके।

वक्त रहते पैकेज की घोषणा हो तभी उसका पूरा लाभ मिल सकता है

4 मई से देश के बड़े हिस्से में गतिविधियां शुरू होंगी। हालांकि बड़े और ओद्योगिक शहरों में सामान्य स्थिति बनने में अभी थोड़ा वक्त लग सकता है लेकिन उद्योगों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वक्त रहते ही पैकेज की घोषणा होगी तभी उसका पूरा लाभ उठाया जा सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि केंद्र की ओर से जो पैकेज घोषित होगा उसमें आर्थिक मदद के साथ साथ कुछ छूट शामिल होंगे।