सोनिया को फिर से कमान सौंपने पर बोले योगानंद शास्त्री, कमजोर कांग्रेस कैसे कर पाएगी मोदी का मुकाबला

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नई दिल्ली कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखने के बाद पार्टी में जारी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता योगानंद शास्त्री ने एक फिर पार्टी शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो कमजोर कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले भाजपा का मुकाबला कैसे कर पाएगी।

केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी को फिर से कांग्रेस की कमान सौंप जाने के मामले पर दैनिक जागरण से बातचीत में योगानंद शास्त्री ने कहा कि सवाल गांधी परिवार का नहीं, कांग्रेस की बेहतरी का है। पार्टी की मजबूती में लिए संगठन में सुधार बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार के त्याग और सोनिया-राहुल के सम्मान में कोई कमी नहीं है। फिर भी संगठन में बदलाव होना चाहिए।

पत्र लिखकर नहीं की अनुशासनहीनता

सोनिया को चिट्ठी लिखने के मामले पर उन्होंने कहा कि हमने पत्र में भी ऐसी कोई बात नहीं लिखी जो अनुशासनहीनता के दायरे में आती हो। उन्होंने कहा कि पार्टी के निर्णयों को लेकर अध्यक्ष की संजीदगी और गंभीरता बहुत जरूरी है। इसलिए पूर्णकालिक अध्यक्ष जरूरी है। यही नहीं, योगानंद शास्त्री ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं।

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी उठाया सवाल

योगानंद शास्त्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी की नियुक्ति और कामकाज पर भी संकेतों में असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मजबूती के लिए पार्टी में बदलाव किए जाने चाहिए।

कौन हैं योगानंद शास्त्री

बता दें कि योगानंद शास्त्री दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और वह सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखने वाले 23 नेताओं में से एक हैं। शीला दीक्षित की नेतृत्व में कांग्रेस सरकार में योगानंद दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष और खाद्य आपूर्ति मंत्री रह चुके हैं।

राहुल गांधी ने उठाया था सवाल

सोमवार को हुई कांग्रेस की बैठक में घमासान तब मच गया था जब राहुल गांधी ने चिट्ठी की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि जब सोनिया गांधी अस्वस्थ थीं और पार्टी मप्र व राजस्थान में संघर्ष कर रही थी, तब ऐसी चिट्ठी लिखने का औचित्य क्या है। बताते हैं कि आवेश में आकर उन्होंने पत्र लिखने वालों पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगा दिया। राहुल के आरोप पर गुलाम नबी आजाद ने इसके साबित होने पर इस्तीफे की धमकी दे दी।

वहीं, सिब्बल ने ट्वीट कर सीधे तौर पर राहुल गांधी का नाम लिया और कहा, ‘वह भाजपा से मिलीभगत की बात करते हैं, जबकि लंबे राजनीतिक जीवन में मैंने कभी भाजपा का साथ नहीं दिया।’ हालांकि, बाद में सिब्बल ने अपना ट्वीट हटा लिया और कहा कि राहुल ने साफ किया है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद आजाद ने भी अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि राहुल का बयान सीडब्ल्यूसी के बाहर बैठे कुछ नेताओं पर केंद्रित था जो ऐसी आधारहीन बातें करते हैं।