Weather Report : केरल में आखिर आ ही गया मानसून, बिहार-झारखंड और यूपी में जल्द होगी झमाझम बारिश

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नई दिल्ली : केरल में मानूसन ने एक हफ्ते की लेट-लतीफी के बाद आखिरकार 8 जून, 2023 यानी गुरुवार को दस्तक दे ही दी. इस बात का ऐलान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को किया है. हालांकि, आईएमडी के मौसम पूर्वानुमान में यह कहा जा रहा था कि अरब सागर में ‘बिपरजॉय’ नामक चक्रवात का गंभीर चक्रवातीय तूफान में तब्दील होने का असर मानसून पर भी दिखाई देगा और केरल में मानसून आने के बाद शुरुआत में मामूली बारिश होगी. आईएमडी ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अपने सामान्य समय से एक सप्ताह के देर के बाद गुरुवार को भारत में दस्तक दे दी है. उसने एक बयान में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुरुवार यानी आठ जून को केरल पहुंच गया है. इसके साथ ही, अब बिहार-झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में भी जल्द ही झमाझम बारिश होने के आसार हैं.

बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहा मानसून

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि मानसून दक्षिण अरब सागर के शेष हिस्सों और मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों तथा समूचे लक्षद्वीप क्षेत्र, केरल के अधिकतर क्षेत्र, दक्षिण तमिलनाडु के अधिकतर हिस्सों, कोमोरिन क्षेत्र के शेष हिस्सों, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण पश्चिम, मध्य एवं उत्तर पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों की ओर बढ़ रहा है.

एक हफ्ते की देर से केरल पहुंचा मानसून

आम तौर पर एक जून को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल में पहुंच जाता है और सामान्यत: एक जून से करीब सात दिन पहले या बाद में यह पहुंचता है. मई के मध्य में आईएमडी ने कहा था कि मॉनसून केरल में चार जून के आसपास पहुंच सकता है. निजी मौसम पूर्वानुमान केंद्र ‘स्काईमेट’ ने केरल में सात जून को मॉनसून के आगमन का अनुमान जताया था और कहा था कि मॉनसून सात जून से तीन दिन आगे पीछे आ सकता है.

150 साल से अपनी तारीख बदल रहा है मानसून

आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 150 वर्षों में केरल में मॉनसून की शुरुआत की तारीख भिन्न रही है. वर्ष 1918 में केरल में मानसून समय से काफी पहले 11 मई को और 1972 में सबसे देरी से 18 जून को आया था. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पिछले साल 2022 को 29 मई, 2021 में तीन जून, 2020 में एक जून, 2019 में आठ जून और 2018 में 29 मई को केरल पहुंचा था.

मुंबई में भी से होगी बारिश

शोध से पता चलता है कि केरल में मॉनसून के आगमन में देरी का मतलब यह नहीं है कि उत्तर पश्चिम भारत में मॉनसून की शुरुआत में देरी होगी. हालांकि, केरल में मानसून के आगमन में देरी आम तौर पर दक्षिणी राज्यों और मुंबई में मानसून की शुरुआत में देरी से जुड़ी होती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि केरल में मानसून के आगमन में देरी भी इस मौसम के दौरान देश में कुल वर्षा को प्रभावित नहीं करती.

अल-नीनो से बारिश प्रभावित नहीं

आईएमडी ने पहले कहा था कि ‘अल-नीनो’ की स्थिति विकसित होने के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम में भारत में सामान्य बारिश होने की उम्मीद है. उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य या उससे कम बारिश होने की उम्मीद है. पूर्व और उत्तर पूर्व, मध्य और दक्षिण प्रायद्वीप में इस दौरान औसत की 94 से 106 फीसदी सामान्य वर्षा होने की उम्मीद है. मानसून की अवधि के दौरान औसत के 90 फीसदी से कम बारिश को ‘वर्षा में कमी’ माना जाता है, 90 फीसदी से 95 फीसदी के बीच बारिश को ‘सामान्य से कम वर्षा’, 105 फीसदी से 110 फीसदी के बीच होने वाली बारिश को ‘सामान्य से अधिक वर्षा’ और 100 फीसदी से ज्यादा होने वाली बारिश को ‘अत्यधिक वर्षा’ माना जाता है.

खेती के लिए सामान्य वर्षा जरूरी

भारत के कृषि परिदृश्य के लिए सामान्य वर्षा का होना बेहद जरूरी है. कुल कृषि क्षेत्र का 52 फीसदी वर्षा पर निर्भर है. यह देश भर में बिजली उत्पादन के अलावा पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को फिर से भरने के लिए भी अहम है. देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में वर्षा आधारित कृषि का लगभग 40 फीसदी योगदान है, जो इसे भारत की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देता है.

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