आईटी कंपनियों में छंटनी पर अमेरिकी सांसद सख्त, एच-1बी वीजाधारकों को रोकने के लिए लिखी चिट्ठी

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वाशिंगटन : दुनिया भर में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग (आईटी इंडस्ट्री) में साल 2022 से ही बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी से अमेरिका के सांसद सख्त और चिंतित नजर आ रहे हैं. अमेरिका के सिलिकॉन वैली के कुछ सांसदों के ग्रुप ने अमेरिकी आव्रजन एजेंसी को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि नौकरी गंवाने के बाद भी बेहद दक्ष एच-1बी वीजाधारकों को अमेरिका में ही रोका जाए. अमेरिका में भारत के सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों (आईटी प्रोफेशनल्स) में एच-1बी वीजा की काफी मांग है.

नवंबर 2022 से दो लाख लोगों की गई नौकरी

बताते चलें कि सर्च इंजन गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी कंपनियों की ओर से अभी हाल के महीनों में छंटनी का सिलसिला शुरू किए जाने के बाद हजारों की संख्या में विदेश में जन्मे कुशल पेशेवरों ने नौकरी गंवा दी है. इनमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं. अमेरिकी मीडिया की खबरों के अनुसार, पिछले साल 2022 के नवंबर से करीब दो लाख आईटी पेशेवरों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है.

निकालने जाने वालों में 30-40 फीसदी भारतीय

आईटी इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि नौकरी से निकाले जाने वालों में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की संख्या 30 से 40 फीसदी के बीच है. इनमें उल्लेखनीय संख्या में आईटी पेशेवर एच-1बी और एल1 वीजा पर यहां आए हैं. अमेरिका में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की मांग काफी अधिक है.

आईटी प्रोफेशनल्स को अमेरिका से निकालना नुकसानदेह

अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं के (यूएससीआईएस) के उर मेंडोजा जद्दू को लिखे पत्र में सांसदों ने कहा है कि प्रवासियों के इस समूह के पास ऐसा कौशल है, जो आज की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में अत्यधिक मूल्यवान है. उन्हें अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर करना हमारे देश की दीर्घावधि की प्रतिस्पर्धा के लिए नुकसानदायक है. यह पत्र अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य जो लोफग्रेन, रो खन्ना, जिमी पैनेटा और केविन मुलिन ने भेजा है. जो लोफग्रेन आव्रजन पर सदन की उपसमिति के पूर्व अध्यक्ष हैं.

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