महाराष्ट्र के भानापुर गांव की आदिवासी युवती ने भरी सपनों की उड़ान, लंदन में करेगी पढ़ाई

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कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…! इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव की बेटी ने…एक छोटे गांव से निकलकर बड़े शहरों में जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना हर किसी का होता है. विदेश जाने के बारे में सोचना तो बहुत दूर की बात होती है, लेकिन महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के सावली तहसील स्थित भानापुर गांव की एक आदिवासी युवती ने विपरीत हालातों से लड़कर एक अनूठा मुकाम हासिल किया है.

दरअसल,भानापुर गांव की प्रिया यशवंत ताडाम ने लंदन के क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी में एलएलएम की पढ़ाई के लिए महाराष्ट्र सरकार की तरफ से 37 लाख 61 हजार 183 रुपये का स्कॉलरशिप हासिल की है. अब वह लंदन में इंटरनेशनल बिजनेस लॉ में एलएलएम की पढ़ाई करेंगी. अपनी इस कामयाबी से प्रिया ने अपने परिवार के साथ पूरे आदिवासी समाज व राज्य का नाम रोशन किया है.

प्रिया कहती हैं कि घने जंगल के बीच स्थित मेरे गांव में करीब 40 आदिवासी परिवारों के घर हैं. जब गांव में कोई स्कूल नहीं था, तब मैं और मेरी छोटी बहन शिवानी घर से करीब दो किलोमीटर दूर पैदल ही प्राथमिक विद्यालय आसोला मेंढा में पढ़ने जाया करती थीं. मेरे पापा के पास इतने पैसे नहीं थे कि हम दोनों बहनों को हॉस्टल में रख सकें. बाद में हम दोनों बहनें अपने एक संबंधी के घर ब्रह्मापुरी में रहने लगीं.

उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए मैं गढ़चिरौली चली गयी, जहां से मैंने हाइस्कूल की पढ़ाई पूरी की. आगे मैंने एलएलबी की पढ़ाई के लिए शासकीय विधि महाविद्यालय नागपुर में दाखिला ले लिया. आज पिता की आर्थिक हालात ठीक न होने बावजूद पढ़ाई के प्रति जिद व लगन के बूते प्रिया नक्सल प्रभावित चंद्रपुर से निकलकर लंदन का सफर तय करने वाली हैं.

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