तेजी से बढ़ रही है कोरोना को मात देने वालों की संख्या, इन लोगों के लिए साबित हो रहा है जानलेवा.

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नई दिल्ली, देश में कोरोना के वायरस को हराने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना के कुल मरीजों में स्वस्थ्य होने वालों का अनुपात 25.19 फीसद पहुंच गया है, जो 14 दिन पहले की तुलना में दोगुनी है। लेकिन कोरोना पुरुषों, बुजुर्गो और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। मरने वालों में आधे से अधिक 60 साल से अधिक के उम्र मरीज हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लगातार मिल रही बढ़त का हवाला देते हुए कहा कि 14 दिन पहले कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की दर 13.06 फीसद थी, जो अब बढ़कर 25.19 फीसद हो गई है। गुरूवार की शाम तक कुल 33,610 मरीजों में 8,373 स्वस्थ्य होकर अपने घर जा चुके हैं। यह बहुत ही सकारात्मक संकेत है। इसी तरह कोरोना के मरीजों की मृत्युदर 3.2 फीसद है। शुरू से ही मृत्युदर इसी स्तर पर बनी हुई है।

 

कोरोना से स्वस्थ्य होने वालों की बढ़ती संख्या के बावजूद यह पुरुषों, बुजुर्गो और पहले से गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। देश में कोरोना से मरने वाले 1075 मरीजों में 65 फीसद पुरूष और 35 फीसदी महिलाएं हैं। उम्र के हिसाब से देंखे तो इसमें 45 साल से कम की उम्र के लोग केवल 14 फीसदी हैं। वहीं 45 से 60 साल का 34.8 फीसदी और 60 से अधिक उम्र के लोगों का प्रतिशद 51.2 फीसद है। यदि 60 से अधिक उम्र को लोगों को दो भागों में बांटकर देंखे तो 60 से 75 साल की उम्र वाले 42 फीसद और 75 साल के ऊपर में 9.2 फीसद लोग हैं।

 

जाहिर है 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए कोरोना खतरनाक साबित हो रहा है। इसी तरह सभी आयु वर्ग को मिलाकर देखें तो कोरोना से मरने वालों में 78 फीसदी ऐसे लोग है, जो पहले से किडनी, हृदय, बीपी, डायबटीज, लीवर या फेफड़े की गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। जाहिर है कोरोना के केस में उम्र और पहले से गंभीर बीमारी से ग्रस्त होना मौत की बड़ी वजह के रूप में सामने आया है।