सुप्रीम कोर्ट आज caa पर अहम सुनवाई करने वाला है.

5

supreme court33 5

सुप्रीम कोर्ट पर आज सबकी नजर टिकी हुई है. दरअसल, शीर्ष कोर्ट नागरिकता संशोधन कानून, 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निस्तारण होने तक केंद्र को नागरिकता संशोधन नियमावली, 2024 के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए गत शुक्रवार को सहमत हुआ था जिसपर आज सुनवाई होने वाली है. आपको बता दें कि प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की इन दलीलों पर गौर किया कि विस्थापित हिंदुओं को नागरिकता दिए जाने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकता है और इसलिए इन मुद्दों पर तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है. इसके बाद सुनवाई की तारीख तय की.

कपिल सिब्बल ने क्या कहा

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि सीएए 2019 में पारित किया गया था. उस समय कोई नियम नहीं थे और इसलिए, कोई स्थगन आदेश नहीं दिया गया था. अब सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले नियमों को अधिसूचित किया है. यदि नागरिकता दी गई तो इसे वापस लेना असंभव होगा. इसलिए अंतरिम अर्जी पर सुनवाई हो सकती है. केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाकर्ताओं के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि किसी भी याचिकाकर्ता के पास नागरिकता प्रदान करने पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है. मेहता ने साथ ही कहा कि सीएए के खिलाफ 237 याचिकाएं लंबित हैं और उनमें से चार अंतरिम आवेदन दायर कर नियमों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है. इसके बाद सीजेआई ने कहा था कि हम मंगलवार को इस पर सुनवाई करेंगे. 190 से अधिक मामले हैं. उन सभी पर सुनवाई की जाएगी. हम अंतरिम याचिकाओं के पूरे बैच की सुनवाई करेंगे.

CAA क्या है, जिससे पाकिस्तानी-बांग्लादेशी शरणार्थी हो जाएंगे हिंदुस्तान के बाशिंदे

किसने दायर की है याचिका

केरल में मुख्य रूप से सक्रिय पार्टी आईयूएमएल और तीन अन्य याचिकाकर्ताओं ने केंद्र द्वारा संशोधित नागरिकता अधिनियम, 2019 को लागू करने के बाद अंतरिम याचिका दायर की है. अधिनियम के संसद में पारित होने के करीब चार साल बाद गैर-दस्तावेजी लोगों को तेजी से नागरिकता देने के लिए नियमों को अधिसूचित किया गया है. इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए गैर-मुस्लिम को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. आईयूएमएल द्वारा दायर आवेदन में अदालत से यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि रिट याचिकाओं पर फैसला आने तक मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए. मुस्लिम सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं.

Source link

Get real time updates directly on you device, subscribe now.