हिंदी सिनेमा में ‘हीरो’ की नयी परिभाषा गढ़ेगी एनिमल की कामयाबी, रोमांटिक हीरो को रिप्लेस करेगा अब अल्फा मर्द

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फिल्म ‘एनिमल’ की रिलीज को 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी ‘एनिमल’ का जादू टिकट खिड़की पर बरकरार है. यह फिल्म हर दिन नये रिकॉर्ड बना रही है. संभावना जतायी जा रही है कि एक्शन से भरपूर और स्टीरियोटाइप हीरो की इमेज को तोड़ने वाली यह फिल्म नये रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ फिल्म मेकिंग में नये ट्रेंड को भी स्थापित करेगी. इसी की पड़ताल करता उर्मिला कोरी का आलेख.

साउथ के मेकर्स की और बढ़ेगी बॉलीवुड में मांग

70-80 के दशक में बॉलीवुड में साउथ की फिल्मों के रीमेक कट-कॉपी-पेस्ट के साथ बनते थे, जिसके निर्देशक साउथ फिल्मों के ही होते थे. 90 के दशक में प्रियदर्शन ने साउथ से हिंदी सिनेमा में अपनी अहम भागीदारी दर्शायी थी. उसके बाद यह कनेक्शन कुछ कमजोर पड़ गया, पर बीते पांच-छह सालों में साउथ की फिल्मों ने टिकट खिड़की पर जिस तरह का जादू बिखेरा बॉलीवुड को एक बार फिर से साउथ की ओर रुख करना पड़ा. इस साल की कामयाब फिल्म ‘जवान’ व ‘एनिमल’ इसका उदाहरण है. ‘जवान’ की तरह ‘एनिमल’ में भी लीड अभिनेत्री साउथ की रश्मिका हैं. आनेवाले वक्त में साउथ के निर्देशकों की भागीदारी और बढ़ने वाली है.

रोमांटिक हीरो को रिप्लेस करेगा अब अल्फा मर्द

हिंदी सिनेमा में हीरो की पॉपुलर छवि रोमांटिक हीरो या एंग्री यंग मैन की रही है, पर ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर का किरदार इन दोनों के परे ‘अल्फा मर्द’ का है, जिस पर जमकर बहस भी हो रही है. वो मर्दवादी सोच का है. नायिका पर अपना वर्चस्व समझता है. गौर करें, तो हीरो में यह स्याह कहीं न कहीं साउथ की फिल्मों से ही आया है. ‘अर्जुन रेड्डी’, ‘केजीएफ’ से लेकर ‘पुष्पा’ तक साउथ की कई फिल्में इसका उदाहरण रही हैं. ‘एनिमल’ की जबरदस्त कामयाबी के चलते हिंदी सिनेमा इसे बढ़ावा देगी. फिल्म समीक्षक गिरीश जौहर कहते हैं कि रणबीर ने ‘एनिमल’ से स्टीरियोटाइप हीरो की इमेज को तोड़ दिया है. एक नये हीरो की परिभाषा को गढ़ा है.

फिल्मों की लंबाई अब नहीं बनेगी कोई बाधा

फिल्म के निर्देशक संदीप बांगा रेड्डी ने ‘एनिमल’ के ट्रेलर लांच पर बताया था कि फिल्म की पहले लंबाई 3 घंटे 45 मिनट की थी, जिसे उन्होंने कट कर तीन घंटे 21 मिनट का कर दिया गया. उसके बाद उन्होंने फिल्म को कई बार देखा, तो उन्हें लगा कि अब फिल्म को और एडिट करने की जरूरत नहीं है. उन्हें लगा कि रणबीर अपने अभियन से दर्शकों को पूरे समय बांधे रखे हुए हैं. क्योंकि फिल्म की लेंथ से फिल्म के मनोरंजक होने का कोई कनेक्शन नहीं है. कई बार 15 मिनट की लघु फिल्म बोझिल लगने लगती है. हिंदी सिनेमा पर गौर करें, तो बीते दो दशक से फिल्मों की लंबाई दो से ढाई घंटे की ही रही है, पर ‘एनिमल’ की कामयाबी मेकर्स को लंबी लेंथ में फिल्में बनाने का भी भरोसा देगी.

फिल्मों के एक्शन में दिखेगा हिंसा का रंग

अल्फा मेल किरदार के साथ-साथ ‘एनिमल’ का वीभत्स एक्शन भी सुर्खियों में है. संदीप वांगा रेड्डी ने फिल्म ‘एनिमल’ के लांच के वक्त कहा था कि जिन्होंने मेरी फिल्म कबीर सिंह को हिंसक कहा था. मैं उन्हें दिखाना चाहता हूं कि हिंसा क्या होती है. ‘एनिमल’ हिंसा का नेक्स्ट लेवल होगी. उन्होंने अपनी बात को सही साबित कर दिया. उन्होंने फिल्म ‘एनिमल’ के एक्शन को रौद्र, भयानक और वीभत्स रस में रंगा है. हीरो बड़ी मशीन गन से मास किलिंग कर रहा है. फिल्म में जमकर खून-खराबा है. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मानें, तो एनिमल की कामयाबी इस ट्रेंड को बढ़ावा देगी. आनेवाले वक्त में एक्शन में वीभत्स का रंग गाढ़ा होकर उभरने वाला है.

फिल्म ‘जवान’ का रिकॉर्ड तोड़ेगी!

साल सबसे सफल फिल्म ‘जवान’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन तोड़ने की उम्मीदें सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर 3’ से थी, पर ‘टाइगर 3’ की बजाय रणबीर कपूर की फिल्म वह दमखम दिखा रही है. हालांकि, फिल्म समीक्षक राज बंसल कहते हैं कि अभी कुछ भी कहना जल्दीबाजी होगी. बॉक्स-ऑफिस पर जिस तरह से फिल्म अच्छा कर रही है, उससे उम्मीदें तो बनती हैं, पर आंकड़ों के इस खेल में कई बार बात बनते-बनते नहीं बन पाती है. ‘जवान’ ने 1052 करोड़ का कलेक्शन किया था, पर ‘एनिमल’ को अभी लंबा सफर तय करना है.

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