Stand With Fernanda दुमका में दुष्कर्म की घटना के बाद गुस्सा

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crime against women

Stand With Fernanda और Justice For Fernanda ये हैशटैग सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है. इसकी वजह यह है कि शुक्रवार एक मार्च को झारखंड के दुमका जिले में एक स्पेनिश महिला के साथ सात लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया. यह मामला महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही यह मसला इसलिए भी बहुत गंभीर है कि तो हमारे देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री खुद स्कूबा डाइविंग तक कर रहे हैं और वहीं दूसरी ओर एक विदेशी महिला के साथ अपने देश में इस तरह की हैवानियत होती है, जो पर्यटकों को डरा सकती है और भारत की छवि विदेश में खराब कर सकती है.

बाइकर्स ग्रुप ने किया कड़ा विरोध

Stand With Fernanda 28 वर्षीय स्पेनिश महिला के साथ जिस तरह की हैवानियत दुमका में हुई वह यह बताने के लिए काफी है कि अभी भी हमारे देश में महिला सुरक्षा को लेकर काफी कुछ किया जाना है. स्पेनिश महिला के साथ जो कुछ हुआ, उसके बाद रविवार को बाइकर्स के ग्रुप ने Stand With Fernanda और Justice For Fernanda हैशटैग से अपनी आवाज बुलंद की है और बाइकर्स के लिए सुरक्षा की मांग की है. साथ ही पीड़िता के लिए न्याय की मांग को दोहराया है. झारखंड की बाइकर Kanchan Ugursandi ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट लिखा है कि इस शेरनी का पास अगर हथियार होता तो अबतक दुमका की पुलिस सातों बलात्कारियों का पोस्टमार्टम करवा रही होती और झारखंड सरकार मुआवजा की घोषणा !

महिला बेचारी नहीं होती

कंचन उगूरसैंडी ने अपने एक्स हैंडल पर लगातार पोस्ट लिखा है और यह कहा भी है कि किसी महिला को बेचारी ना कहा जाए, जो महिला हजारों किलोमीटर की यात्रा अकेले तय करती है वो भी बाइक से वो बेचारी कैसे हो सकती है. बाइकर्स के इस अभियान को लोगों का सपोर्ट भी काफी मिल रहा है और लगातार लोग इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं.

झारखंड में बढ़ी है दुष्कर्म की घटनाएं

झारखंड में दुष्कर्म की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं. 2015 से 2023 तक में कुल 13.533 केस दुष्कर्म के दर्ज हुए हैं. आंकड़ों की मानें तो प्रतिदिन चार महिलाओं के साथ रेप होता है. पुलिस विभाग की वेबसाइट के अनुसार जनवरी 2023 में 105, फरवरी में 128, मार्च में 110, अप्रैल में 113, मई में 177, जून में 166, जुलाई में 160, अगस्त में 143, सितंबर में 149, अक्टूबर में 136, नवंबर में 117 और दिसंबर में 116 केस दर्ज कराए गए हैं. जबकि इस बात से सभी वाकिफ है कि जितने अपराध होते हैं, उतने रेप के केस दर्ज नहीं होते हैं.

रेप ताकत से नहीं विचार से होते हैं

निर्भया केस के बाद सरकार ने बलात्कार को रोकने के लिए देश में मौत की सजा का प्रावधान भी किया है, बावजूद इसके देश में प्रतिदिन रेप के 86 केस दर्ज हो रहे हैं, यह आंकड़ा राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो का है. तब सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों रेप के केस रूक नहीं रहे हैं, इसका जवाब देते हुए सोशल एक्टिविस्ट और महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली किरण कहती हैं कि रेप ताकत से नहीं बल्कि विचारों से होते हैं. हमारे समाज में यह धारणा है कि स्त्री का मान मर्दन कभी भी हो सकता है. हमारे यहां इस पर बात होती है कि वह अकेली थी, वह बिना बताये रात को गई इसलिए रेप हुआ, इसपर बात नहीं होती कि रेप हुआ क्यों? किरण कहती है कि दुमका में जो कुछ हुआ वह शर्मिंदा करने वाली घटना है. समाज को इसपर विचार करना चाहिए, समाज को यह सोचना चाहिए कि एक स्त्रीमन पर क्या बीती होगी? रेप की घटनाएं पूरे विश्व में होती हैं, लेकिन अपने देश में हैवानियत की हद है, जो सोचने पर मजबूर करता है.

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