स्कूल ने नहीं भेजी उत्तर पुस्तिका, छात्र हो गया फेल, शिक्षा विभाग ने दिया एक लाख मुआवजा

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नई दिल्ली, बुराड़ी के एक स्कूल के छात्र अर्जुन चौधरी को उनके परीक्षा परिणाम के साथ हुई लापरवाही के लिए शिक्षा विभाग ने मुआवजे के तौर 1लाख का भुगतान किया है। 3 वर्ष बाद दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देशानुसार यह कार्रवाई हुई। जांच में स्कूल के प्रिंसिपल और 2 अध्यापकों की गलती सामने आई। आयोग ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि दोषी अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

 

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में कादीपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल विद्यालय के कुछ अध्यापकों की लापरवाही के कारण 10वीं में अच्छे अंक मिलने के बाद भी अर्जुन को फेल कर दिया गया। वजह सामने यह आई कि शिक्षकों द्वारा उसके अंक बोर्ड को नहीं भेजे गए। इस लापरवाही के कारण छात्र बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद फेल हो गया। इस मामले में जब छात्र ने शिकायत की तो उसके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया गया।

इस मामले में उप प्रधानाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह और स्कूल प्रबंधन कमेटी के उपाध्यक्ष विकास सैनी ने छात्र की मदद करते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान छात्र द्वारा लिखी गईं उत्तर पुस्तिकाएं गायब मिलीं जबकि उसके अंक और उपस्थिति दोनों दर्ज पाई गईं। ऐसे में बच्चे के अभिभावक ने मामले की शिकायत बाल अधिकार संरक्षण आयोग में की। इस पर लंबे समय तक जांच चलती रही।इस दौरान स्कूल प्रबंधन कमेटी की टीम लगातार शिक्षा विभाग व सीबीएसई के संपर्क में रही। 3 साल बाद अर्जुन को 3 लाख का मुआवजा मिला है।

अर्जुन (पीड़ित छात्र) का कहना है कि 2017 में 10वीं की परीक्षा के बाद पेपर के नंबर नहीं भेजे गए, जिसके कारण मैं फेल हो गया। इसके लिए मैंने शिक्षा निदेशालय, बाल अधिकार आयोग और उपराज्यापाल को पत्र लिखा था। जांच में मेरे द्वारा लिखे गए पेपर नहीं मिले, जबकि मेरी उपस्थिति और अंक दर्ज मिले। 17 नवंबर 2018 में मुझे मेरा परीक्षा परिणाम मिला और मैं पास हुआ। कार्रवाई में बहुत ज्यादा वक्त निकल गया।

नागेश्वर चौधरी (छात्र के पिता) का कहना है कि जो नंबर मिले हैं उससे संतुष्टि नहीं है, क्योंकि बच्चे के अनुसार उसने जैसे पेपर दिए थे उस आधार पर नंबर अधिक मिलने चाहिए थे।

विकास सैनी (चेयरमैन, स्कूल प्रबंधन कमेटी) का कहना है कि यह मुआवजा शिक्षा विभाग ने दिया है, लेकिन मेरी मांग है कि इसकी वसूली दोषियों से की जाए। ऐसी लापरवाही की वजह बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। इसमें सख्त कार्रवाई जरूरी है।