केजरीवाल सरकार की नाक के नीचे दिल्ली राज्य सहकारी बैंक में हुआ भर्ती घोटाला

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दिल्ली न्यूज 24 के पास उन सभी बोर्ड मीटिंग्स के मिनट्स के दस्तावेज मौजूद हैं जिनमें अनीता रावत को नियमों का उल्लंघन कर चेयरमैन बिजेन्द्र सिंह ने मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया। चेयरमैन बिजेन्द्र सिंह ने अनीता रावत को मैनेजिंग डायरेक्टर बनाने के लिए 25 दिनों के अन्दर अनीता रावत को तीन-तीन बार प्रमोशन दी। जी हाँ, सिर्फ 25 दिनों के अन्दर तीन-तीन प्रमोशन।

केजरीवाल सरकार की नाक के नीचे दिल्ली राज्य सहकारी बैंक में हुआ भर्ती घोटाला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अक्सर बेरोजगारी के मुद्दे पर घेरने वाले दिल्ली के मुखिया अरविन्द केजरीवाल की नाक के नीचे स्टेट कोआपरेटिव बैंक में जिसे रिजर्व बैंक से सेकेण्ड शिड्यूलड बैंक का दर्जा भी प्राप्त है उस स्टेट कोआपरेटिव बैंक के विभिन्न ब्रांचों में … विभिन्न पदों पर … बोर्ड आॅफ डायरेक्टर्स के रिश्तेदारों की बड़े पैमाने पर फर्जी भतियां होती रहीं और मामला संज्ञान में होने के बावजूद दिल्ली सरकार के सहकारिता मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम और दिल्ली सरकार के रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसायटी ने सालों तक इस बैंक की शाखाओं में हो रही अनियमितताओं पर आंखें मूंदें रखीं।

दिल्ली राज्य सहकारी बैंक दिल्ली की केजरीवाल सरकार के अधीन संचालित होने वाला 50 से अधिक शाखाओं का एक बड़ा बैंक समूह है। दूसरे शब्दों में कहें तो ये राजधानी दिल्ली का स्टेट कोआपरेटिव बैंक है। दिल्ली के तकरीबन हर विधानसभा क्षेत्र में इस बैंक की शाखाएं हैं। इन सभी शाखाओं का मुख्य कार्यालय दिल्ली के दरियागंज में है।

दिल्ली की सभी शाखाओं का संचालन यही से होता है और इन सभी शाखाओं के संचालन की जिम्मेवारी मैनेजिंग डायरेक्टर के कांधों पर होती है। मौजूदा समय में दिल्ली राज्य सहकारी बैंक की मैनेजिंग डायरेक्टर यानि एमडी अनीता रावत हैं। अनीता रावत की नियुक्ति मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर 22 अप्रैल 2016 को हुई थी। परन्तु इस नियुक्ति में दिल्ली कोआपरेटिव सोसायटी एक्ट 2007 के प्रावधानों का खुल्लमखुला उल्लंघन किया गया है। इस एक्ट की धारा 35 में यह साफ तौर पर वर्णित है कि मैनेजिंग डायरेक्टर की नियुक्ति सरकार की सलाह से की जायेगी। जिस समिति द्वारा यह नियुक्ति की जायेगी उसमें दो सरकार द्वारा नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे जिसमें एक सहकारिता विभाग की ओर से और एक वित्त विभाग की ओर से होगा। साथ ही एक नामित प्रतिनिधि नाबार्ड की तरफ से भी होगा। शेष सोलह निदेशक में पांच अलग-अलग सहकारी समितियों से लिये जाएंगे और ग्यारह सदस्य चुनाव द्वारा निर्वाचित होंगे।

परन्तु, अनीता रावत की नियुक्ति के मामले में दिल्ली कोआपरेटिव सोसायटी एक्ट 2007 के प्रावधानों का खुल्लमखुला उल्लंघन किया गया है। दिल्ली न्यूज 24 के पास उन सभी बोर्ड मीटिंग्स के मिनट्स के दस्तावेज मौजूद हैं जिनमें अनीता रावत को नियमों का उल्लंघन कर चेयरमैन बिजेन्द्र सिंह ने मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया। चेयरमैन बिजेन्द्र सिंह ने अनीता रावत को मैनेजिंग डायरेक्टर बनाने के लिए 25 दिनों के अन्दर अनीता रावत को तीन-तीन बार प्रमोशन दी। जी हाँ, सिर्फ 25 दिनों के अन्दर तीन-तीन प्रमोशन।

शुरूआत करते हैं 29 मार्च 2016 की बोर्ड आॅफ डायरेक्टर्स की बैठक से। इस बैठक के मिनट्Þस के मुताबिक, तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर आर.एस. दहिया को अगले एक साल के लिए एक्सटेन्शन दिया गया था। साथ ही इस बैठक में अनीता रावत को डिप्टी जनरल मैनेजर से एडिशनल जनरल मैनेजर के तौर पर प्रमोशन दी गई। इस बैठक के महज तीन दिन बाद 2 अप्रैल 2016 को बोर्ड आॅफ डायरेक्टर्स की दूसरी बैठक होती है और उस बैठक में बताया जाता है कि आर.एस. दहिया ने एक्सटेन्शन लेने से इन्कार कर दिया गया है और उसी दिन अनीता रावत को दूसरी प्रमोशन दी जाती है और उसे आॅफिशिएटिंग मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया जाता है। इसके बाद 20 दिनों के अन्दर 22 अप्रैल 2016 को बोर्ड आॅफ डायरेक्टर्स की तीसरी बैठक होती है जिसमें महज 9 डायरेक्टर शामिल होते हैं जबकि दिल्ली कोआपरेटिव सोसायटी एक्ट 2007 के मुताबिक किसी भी बैठक के कोरम को पूरा करने के लिए कम-से-कम दस सदस्यों का बैठक में शामिल होना जरूरी है। परन्तु, कोरम पूरा किये बगैर ही चेयरमैन बिजेन्द्र सिंह ने 22 अप्रैल 2016 की उस बैठक में अनीता रावत को तीसरी प्रमोशन दी मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर।

यानि महज 25 दिनों के अन्दर अनीता रावत को चेयरमैन बिजेन्द्र सिंह ने तीन-तीन बार प्रमोशन दी और बिठा दिया मैनेजिंग डायरेक्टर की कुर्सी पर। और तो और इसके लिए दिल्ली सरकार से कोई सलाह-मशविरा तक नहीं किया गया।

मैनेजिंग डायरेक्टर अनीता रावत की नियुक्ति में हुए इस फर्जीवाड़े की पड़ताल के दौरान जब हमने नाबार्ड से सम्पर्क किया और जानना चाहा कि दिल्ली राज्य सहकारी बैंक द्वारा अनीता रावत को मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने वाली कमेटी में नाबार्ड की तरफ से नॉमिनी सदस्य कौन था तो 15 सितम्बर 2020 को नाबार्ड ने दिल्ली न्यूज 24 को मेल से भेजे गये अपने स्पष्टीकरण में स्वीकार किया कि नाबार्ड की तरफ से नामित डायरेक्टर उस मीटिंग में शामिल ही नहीं हुए जिसमें अनीता रावत को मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया। जब नाबार्ड से हमने जानना चाहा कि आखिर उनकी जानकारी के बिना अनीता रावत को मैनेजिंग डायरेक्टर कैसे नियुक्त किया गया तो नाबार्ड ने जवाब दिया कि मैनेजिंग डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए नाबार्ड से परमिशन लेना आवश्यक नहीं है। जबकि दिल्ली कोआपरेटिव सोसायटी एक्ट 2007 के अधिनियम 35 में यह साफ तौर पर दर्ज है कि जिस कमेटी द्वारा मैनेजिंग डायरेक्टर की नियुक्ति की जायेगी उसमें नाबार्ड का नामित एक सदस्य होना जरूरी है।

यहां यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि दिल्ली राज्य सहकारी बैंक की प्रबन्ध समिति में नाबार्ड की तरफ से नामित सदस्य असित कुमार महान्ति उन तीनों बैठकों में लगातार उपस्थित नहीं थे जिसमें महज 25 दिनों के भीतर अनीता रावत को तीन-तीन दफा प्रमोशन दी गई। बावजूद इसके ना तो कभी नाबार्ड ने इस मामले में कोई आपत्ति की और ना ही असित कुमार महान्ति ने इसकी शिकायत किसी सक्षम प्राधिकार से करने की जरूरत समझी। इन्हीं असित कुमार महान्ति द्वारा 14 जुलाई 2017 को एक आरटीआई का जवाब कौशल किशोर नामक व्यक्ति को दिया गया जिसमें इन्होंने नाबार्ड के केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी के तौर पर जवाब दिया था कि दिल्ली राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड ने अनीता रावत को बैंक की मैनेजिंग डायरेक्टर बनाने की परमिशन नाबार्ड से नहीं ली थी। अनीता रावत को मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्ति में जिस तरह से असित कुमार महान्ति ने चुप्पी बनाये रखी इसकी जाँच होनी चाहिये।

अनीता रावत को नियमों का उल्लंघन कर मैनेजिंग डायरेक्टर बनाये जाने की शिकायत दिल्ली न्यूज 24 ने दिल्ली लोक शिकायत आयोग को भी भेजी जिसपर 8 सितम्बर 2020 को पब्लिक ग्रीवयान्स कमीशन ने रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसायटी को इस मामले पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। परन्तु, शायद खुद दिल्ली सरकार के रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसायटी के पास भी अनीता रावत की नियुक्ति वैध होने के संदर्भ में जानकारी नहीं है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि 21 सितम्बर 2020 को आरसीएस कार्यालय ने हमें मेल से एक पत्र भेजा गया जिसमें हमारी मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर अनीता रावत की नियुक्ति का स्पष्टीकरण देने की जिम्मेवारी आरसीएस कार्यालय ने दिल्ली राज्य सहकारी बैंक की एमडी अनीता रावत के कांधों पर ही छोड़ दी। यानि, अब खुद एमडी अनीता रावत ही अपने वैध होने का प्रमाण पत्र जारी करेगी। यानि, आरसीएस कार्यालय के पास अनीता रावत की नियुक्ति के दस्तावेज ही मौजूद नहीं है।

कमाल की बात है ना… रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसायटी जिसके ऊपर दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के प्रबन्धन और सभी प्रकार की कार्रवाई का अधिकार है उसे ही यह जानकारी नहीं है कि इस बैंक की एमडी अनीता रावत की नियुक्ति वैध है या नहीं। इसका सीधा-सा मतलब है कि या तो दिल्ली राज्य सहकारी बैंक अपना सालाना लेखा-जोखा और चुनाव तथा नियुक्ति संबंधित जानकारी आरसीएस कार्यालय में जमा नहीं कराता या तो फिर आरसीएस कार्यालय में पदस्थापित अधिकारियों को दिल्ली कोआपरेटिव सोसायटी एक्ट 2007 के प्रावधानों की ठीक से समझ नहीं है। इसके साथ ही यहां यह भी बताना जरूरी है कि पब्लिक ग्रीवयान्स कमीशन ने दोबारा आरसीएस को 4 नवम्बर 2020 को तीन सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया जिसका आजतक आरसीएस कार्यालय ने कोई जवाब नहीं दिया। जबकि इसी रजिस्ट्रार कार्यालय ने एक अन्य शिकायतकर्ता ललित कुमार की शिकायत पर इसी दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के विरूद्ध दिल्ली कोआपरेटिव सोसायटी एक्ट 2003 की धारा 61 के तहत जाँच के आदेश 20 जुलाई 2020 को जारी किये थे परन्तु, आज चार महीने बीत जाने के बावजूद आरसीएस कार्यालय ने जाँच अधिकारी की नियुक्ति तक नहीं की और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

इसके बाद दिल्ली न्यूज 24 ने अनीता रावत की अवैध नियुक्ति और आरसीएस की कारगुजारियों की शिकायत पीएमओ को भेजी जिसे पीएमओ ने दोबारा पब्लिक ग्रीवायन्स कमीशन को कार्रवाई के लिए भेजा है। इसी मामले में हमारे सहयोगी न्यूज पोर्टल ग्लैम डस्ट लाइव की शिकायत को भी भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने आरबीआई मुम्बई को जाँच के लिए भेजा है।