बंदउँ बालरूप सोइ रामू, सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू, पढ़ें सीएम योगी का खास लेख

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श्रीरामलला के श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में विराजने की तिथि जबसे सार्वजनिक हुई है, हर सनातन आस्थावान 22 जनवरी की प्रतीक्षा में है. संपूर्ण राष्ट्र में ऐसे समवेत उल्लास और आनंदमय वातावरण का दूसरा उदाहरण हाल की कई शताब्दियों में देखने को नहीं मिलता. कोई ऐसा समारोह, जहां शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, पात्य, सिख, बौद्ध, जैन, दशनाम शंकर, रामानंद, रामानुज, निम्बार्क, माध्व, विष्णु नामी, रामसनेही, घिसापंथ, गरीबदासी, अकाली, निरंकारी, गौड़ीय, कबीरपंथी सहित भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म, संप्रदाय, पूजा पद्धति, परंपरा के सभी विद्यालयों के आचार्य, 150 से अधिक परंपराओं के संत गण, 50 से अधिक वनवासी, गिरिवासी, द्वीपवासी परंपराओं के प्रमुख व्यक्तियों उपस्थिति हो, जहां एक छत्र के नीचे राजनीति, विज्ञान, उद्योग, खेल, कला, संस्कृति, साहित्य आदि विविध विधाओं के लब्धप्रतिष्ठ जन एकत्रित हों, अभूतपूर्व है. दुर्लभ है. भारत के इतिहास में प्रथम बार पहाड़ों, वनों, तटीय क्षेत्रों, द्वीपों आदि के वासियों द्वारा एक स्थान पर ऐसे किसी समारोह में प्रतिभाग किया जा रहा है. यह अपने आप में अद्वितीय है. इस भव्य समारोह में आज श्रीरामलला के समक्ष यशस्वी प्रधानमंत्री जी 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे. अयोध्याधाम में आज लघु भारत के दर्शन होंगे. यह गौरवपूर्ण अवसर है. उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से मैं पावन अयोध्याधाम में सभी का अभिनंदन करता हूं.

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