रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से बिलबिलाया कंगाल पाकिस्तान, फिर उगला जहर, मुसलमानों को भड़काने की कोशिश

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कंगाली के दरवाजे पर खड़ा पाकिस्तान अयोध्या में रामलला की भव्य प्राण प्रतिष्ठा से बिलबिला गया है. उसने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की निंदा की है. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की ओर से बयान आया है, जिसके कहा गया है कि राम मंदिर अभिषेक समारोह भारत के बढ़ते बहुसंख्यकवाद का संकेत है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी कहा कि चरमपंथियों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से बयान आया है कि दुर्भाग्य से भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका ने ढांचा गिराने वालों को बरी कर दिया, बल्कि उसके स्थान पर एक मंदिर के निर्माण की भी अनुमति दे दी.

प्राण प्रतिष्ठा से बिलबिलाया पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा भारत में बढ़ते बढ़ते बहुसंख्यकवाद के संकेत हैं. पाकिस्तान ने भारतीय मुसलमानों को भड़काने की कोशिश की है. उसने कहा है कि यह भारत की मुसलमानों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से हाशिए पर भेजने की कवायत है. पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि यह भारत के लोकतंत्र पर एक धब्बा है. बता दें, आर्थिक रूप से पाकिस्तान कंगाली के दौर से गुजर रहा है. भारत के खिलाफ हमेशा वो आतंकी गितिविधियों में लगा रहता है. हाल के दिनों में ईरान ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तानी इलाके में बम बरसाये थे.

राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन
गौरतलब है कि करीब 500 साल के लंबे इंतजार के बाद आज एक बार फिर रामलला अयोध्या में विराजमान हो गये. पीएम मोदी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पीएम मोदी ने मंच से वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि अब रामलला टेंट में नहीं बल्कि अब वो नये भव्य मंदिर में रहेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि सदियों के इंतजार के बाद राम पधारे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है. हजारों सालों बाद भी लोग इस दिन की चर्चा करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला
गौरतलब है कि राम मंदिर विवाद में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने साल 2019 में राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा था कि ऐसे सबूत हैं जो विवादित स्थल पर एक हिंदू मंदिर के अस्तित्व को साबित करते हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण की अनुमति दे दी. साथ ही मस्जिद के निर्माण के लिए भी जमीन का एक हिस्सा मुस्लिम पक्षों को दिया गया.

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