Nagara architecture: 392 स्तंभ, 44 दरवाजे और 5 मंडप… राम मंदिर की विशेषता, जानें क्या है ‘नागर वास्तुकला’

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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो गई है. कल से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुल रहा है. देश के कोने-कोने से लोग आकर रामलला के दर्शन कर सकते हैं. अयोध्या का राम मंदिर जितना भव्य है उतना ही श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस भी होगा. राम मंदिर का अपना जल शोधन संयंत्र और बिजली उपकेंद्र होगा. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने यह जानकारी दी है. ट्रस्ट के अनुसार मंदिर परिसर में एक सीवेज संयंत्र, जल उपचार संयंत्र, अग्नि सुरक्षा के लिए जल आपूर्ति और एक स्वतंत्र बिजली उपकेंद्र होगा. इसके अलावा 25 हजार लोगों की क्षमता वाले एक तीर्थयात्री सुविधा केंद्र का निर्माण किया जा रहा है जिसमें तीर्थयात्रियों के लिए चिकित्सा और लॉकर की सुविधा होगी.

मिली जानकारी के मुताबिक राम मंदिर का निर्माण पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है. इसका निर्माण पर्यावरण-जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए किया जा रहा है. ट्रस्ट के अनुसार 70 एकड़ क्षेत्र के 70 फीसदी हिस्से को हरा-भरा रखा गया है. राम मंदिर का निर्माण भवन निर्माण की पारंपरिक नागर शैली में किया जा रहा है. पूर्व-पश्चिम दिशा के मंदिर की लंबाई 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट है. मंदिर तीन मंजिला है, जिसकी प्रत्येक मंजिल 20 फीट ऊंची है. इसमें कुल 392 खंभे और 44 दरवाजे हैं. मुख्य गर्भगृह में भगवान राम के बाल स्वरूप विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की गई है और पहली मंजिल पर श्री राम दरबार होगा.

श्री राम मंदिर ट्रस्ट ने बताया है कि मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से सिंह द्वार की तरफ से होगा. परिसर के चारों कोनों पर सूर्य देव, देवी भगवती, भगवान गणेश और शिव को समर्पित चार मंदिर होंगे. वहीं मंदिर की नींव का निर्माण रोलर-कॉम्पैक्ट कंक्रीट की 14 मीटर मोटी परतों से किया गया है, जो देखन में कृत्रिम चट्टान नजर आता है. सीलन से सुरक्षा के लिए ग्रेनाइट का उपयोग करके 21 फुट ऊंचे चबूतरे का निर्माण किया गया है. वहीं, अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य द्वार पर हाथियों, शेरों, भगवान हनुमान और ‘गरुड़’ की अलंकृत मूर्तियां स्थापित की गई हैं.

नागर शैली से बन रहा है राम मंदिर
राम मंदिर की डिजाइन गुजरात की सोमपुरा परिवार ने तैयार किया है. मंदिर को नागर शैली में बनाया जा रहा है. बता दें, 5वीं शताब्दी के दौरान यह पद्धति सामने आयी थी. भारत के कई मंदिरों को इसी पद्धति से बनाया गया है. मंदिर वास्तुकला की नागर शैली काफी समय से उत्तर भारत में लोकप्रिय रही है. इस शैली के अनुसार मंदिरों का निर्माण एक पत्थर के चबूतरे पर किया जाता है. इस शैली के तहत गर्भगृह हमेशा सबसे ऊंचे टावर के नीचे स्थित होता है.

इन मंदिर को भी नागर शैली से बनाया गया है
खजुराहो का कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो के मंदिर, भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर, पुरी का जगन्नाथ मंदिर, कोणार्क का कोणार्क का सूर्य मंदिर, मुक्तेश्वर मंदिर, राजस्थान का दिलवाड़ा के मंदिर, गुजरात का सोमनाथ मंदिर सभी मंदिर नागर शैली में बनाए गए हैं. अयोध्या के राम मंदिर को भी इसी शैली में बनाया जा रहा है.

दक्षिण दिशा से होगा निकास
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से और निकास दक्षिण दिशा से होगा. मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पूर्व दिशा से 32 सीढ़ियां चढ़ेंगे. मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राम मंदिर की ओर जाने वाले मुख्य द्वार पर मूर्तियां स्थापित की गयी. इन मूर्तियों को मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों के दोनों ओर लगाए गए स्तरीय फलकों पर स्थापित किया गया है. भाषा इनपुट के साथ

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