Raksha Bandhan 2020: कंगना रनोट ने भाई अक्षत से कहा- ‘मैंने तुम्हारी पहुंच से बाहर अपने दुश्मन बना लिये हैं’

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Raksha Bandhan 2020: कंगना रनोट ने भाई अक्षत से कहा- ‘मैंने तुम्हारी पहुंच से बाहर अपने दुश्मन बना लिये हैं’
Raksha Bandhan 2020 कंगना ने लिखा- जब वो मेरे चरित्र पर लांछन लगाते हैं तो मैं तुम्हें चुपचाप बिखरते हुए देखती हूं। जब मैं सिस्टम को चैलेंज करती हूं तो माता-पिता मुझे डांटते हैं।

नई दिल्ली,  भाई-बहन को समर्पित त्योहार रक्षा बंधन देशभर में धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके लिए अपना प्रेम ज़ाहिर किया तो भाइयों ने रक्षा का वचन लिया। वैसे बॉलीवुड में भी इस त्योहार की अलग ही धूम रहती है। पर्दे से लेकर रियल लाइफ़ में सेलेब्रिटीज़ इस त्योहार को मनाते हैं।

कंगना रनोट और उनकी बहन रंगोली चंदेल ने अपने भाइयों को राखी बांधकर त्योहार सेलिब्रेट किया। इस मौक़े पर कंगना ने भाई अक्षत को संबोधित करते हुए लिखा- जब हम बच्चे थे, पापा तुम्हारे के लिए प्लास्टिक की गन और मेरे लिए साइकिल लेकर आते थे। मैं तुम्हारी गन से खेलती थी और तुम मेरी साइकिल चलाते थे। मुझे तुम्हारा सेंस ऑफ़ ह्यूमर पसंद है। तुम्हारे साथ कभी बोझिल वक़्त नहीं बीतता।

मैं जानती हूं कि मैंने तुम्हारी पहुंच से बाहर अपने दुश्मन बना लिये हैं, लेकिन जब वो मुझे परेशान करते हैं, तो मैं तुम्हारी मजबूरी देखती हूं। जब वो मेरे चरित्र पर लांछन लगाते हैं तो मैं तुम्हें चुपचाप बिखरते हुए देखती हूं। जब मैं सिस्टम को चैलेंज करती हूं तो माता-पिता मुझे डांटते हैं और बहुत हंगामा होता है, लेकिन मैं तुम्हें चुपचाप अपने पीछे खड़ा देखती हूं। मुझे अच्छा लगता है कि मेरे ट्रेलर्स पर आने वाले सारे कमेंट तुम पढ़ते हो, लेकिन जब मेरी फ़िल्म अच्छी नहीं चलती तो तुम्हारा परेशान होना मुझे अच्छा नहीं लगता।

सबसे बड़ी बात जो तुम्हारी अच्छा लगती है, वो यह कि तुम कभी नहीं दिखाते कि मेरा कितना ख्याल रखते हो। मैं तुम्हें प्यार करती हूं और तुम्हारा जैसा भाई पाकर भाग्यशाली मानती हूं। कंगना की टीम ने इंस्टाग्राम पर तस्वीरें भी शेयर की हैं।

बता दें कि कंगना इन दिनों सुशांत सिंह राजपूत की सुसाइड के केस पर मुखरता के साथ अपनी बात रख रही हैं। सोशल मीडिया के ज़रिए कंगना की टीम लगातार इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रही है। कंगना ने सुशांत की सुसाइड के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज़्म और पक्षपात के मुद्दे को भी ज़ोरशोर से उछाला था और उसे बहस के केंद्र में लेकर आयीं।