राजस्थान : आखिर वसुंधरा राजे को क्यों भाव नहीं दे रही बीजेपी ? चुनाव प्रबंधन व घोषणा पत्र समिति में नाम नहीं

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राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले बीजेपी ने कमर कस ली है. इस बीच पार्टी ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को यहां दो महत्‍वपूर्ण समितियों, चुनाव प्रबंधन समिति व संकल्प (घोषणा) पत्र समिति के गठन की घोषणा की. इन दोनों ही समितियों में पूर्व मुख्‍यमंत्री व पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे का नाम नजर नहीं आ रहा है. जब इस संबंध में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वसुंधरा राजे हमारी वरिष्ठ नेता हैं…हमने उन्हें कई कार्यक्रमों में शामिल किया है और भविष्य में भी उन्हें हम शामिल करते रहेंगे.

वहीं वसुंधरा राजे की भूमिका के बारे में पूछे गए प्रश्न को प्रदेश प्रभारी अरूण सिंह ने यह कहते हुए टाल दिया कि ‘बाकी सभी वरिष्ठ नेता प्रचार करेंगे.’ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी व प्रदेश प्रभारी अरूण सिंह ने यह घोषणा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतप्रकाश नड्डा के निर्देशानुसार इन समितियों की घोषणा की गई है और उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले चुनाव में दोनों समितियों के अनुभव का लाभ प्रदेश को मिलेगा. इसके तहत घोषणा पत्र समिति की कमान केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को जबकि चुनाव प्रबंधन समिति की कमान पूर्व सांसद नारायण पंचारिया को दी गई है.

अचानक दिल्ली गईं थीं वसुंधरा राजे

पिछले महीने बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के साथ हुई बैठक के बाद वसुंधरा राजे के अचानक दिल्ली दौरे के बाद से ही राजनीतिक अटकलों का दौर जारी है. बीएल संतोष ने राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में बीजेपी नेताओं के साथ बैठक की थी. इस बैठक में वसुंधरा राजे भी नजर आयीं थीं. बीएल संतोष के साथ हुई इस बैठक के बाद वसुंधरा राजे का अचानक दिल्ली दौरा हुआ जिसके बाद कई तरह के कयास लगाये जाने लगे. वसुंधरा राजे ने राजधानी दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी. सूत्रों के हवाले से जो मीडिया में खबर चल रही थी उसके अनुसार, वसुंधरा राजे ने चुनाव में अपनी भूमिका स्पष्ट करने का आग्रह बीजेपी के शीर्ष नेताओं से किया है.

कांग्रेस के निशाने पर वसुंधरा राजे

उल्लेखनीय है कि राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के निशाने पर वसुंधरा राजे हैं और उनके कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर शोर से उठा रहे हैं. इसके बाद बीजेपी प्रदेश में खासा ध्यान दे रही है. भाजपा ने पिछले दिनों केंद्रीय कोयला मंत्री ने प्रह्लाद जोशी को राजस्थान का जिम्मा सौंपा है जिसके बाद वे प्रदेश पर पैनी नजर बनाये हुए हैं. राजस्थान में विधानसभा चुनाव के महज कुछ महीने ही रह गये हैं. कांग्रेस जहां प्रदेश में दोबारा सत्ता पर काबिज होने के लिए पूरा जोर लगा रही है. वहीं बीजेपी ने भी अपने चुनावी प्लान को और मजबूत किया है. इस बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच हुई सुलह से वसुंधरा राजे की मुश्किलें बढ़ने के कयास लगाये जा रहे हैं.

‘प्रदेश संकल्प पत्र समिति’ के संयोजक होंगे केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि पार्टी की ‘प्रदेश संकल्प पत्र समिति’ के संयोजक केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल होंगे. इस 25 सदस्यीय समिति में राज्यसभा सदस्य घनश्याम तिवाड़ी व किरोड़ी लाल मीणा, राष्ट्रीय मंत्री अल्का सिंह गुर्जर, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राव राजेंद्र सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया, पूर्व मंत्री प्रभु लाल सैनी तथा राखी राठौड़ को सह संयोजक बनाया गया है. वहीं प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद नारायण पंचारिया को बनाया गया है. इस समिति में 25 सदस्य हैं. इसमें पार्टी के पूर्व प्रदेश महामंत्री ओंकार सिंह लखावत, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़, प्रदेश महामंत्री भजनलाल, प्रदेश महामंत्री दामोदर अग्रवाल, पूर्व सूचना आयुक्त सीएम मीणा सह संयोजक व कन्हैया लाल बैरवाल सह संयोजक होंगे.

राज्य में प्रचार प्रसार समिति पर टिकी नजर

उल्लेखनीय है कि राज्य में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. हालांकि पार्टी ने इन दोनों ही महत्वपूर्ण समितियों में पूर्व मुख्यमंत्री राजे को नहीं रखकर सबको चौंका दिया है. जब राजे की भूमिका बारे में पूछा गया तो पार्टी के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने केवल इतना कहा, ‘‘बाकी सभी वरिष्ठ नेता प्रचार करेंगे.’’ राजनीति के जानकारों के अनुसार पार्टी को अभी राज्य में प्रचार प्रसार समिति बनानी है और देखना होगा कि इसमें राजे का नाम आता है या नहीं.

बिना सीएम फेस के चुनावी मैदान में उतरेगी बीजेपी

राजनीति के जानकारों की मानें तो बीजेपी में सीएम फेस को लेकर पार्टी आलाकमान असमंजश में है. यदि आपको याद हो तो राजस्थान दौरे पर पहुंचे बीएल संतोष ने साफ शब्दों में कहा था कि प्रदेश में पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाएगा. इसके बाद से ही साफ हो गया था कि वसुंधरा राजे राजस्थान में मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं होंगी. गौर हो कि वसुंधरा राजे सिंधिया वर्तमान में पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर हैं, लेकिन वे राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी को लेकर भी दिल्ली का रुख कर रहीं है. वसुंधरा गुट की तरफ से लगातार आलाकमान पर दवाब बनाने का काम किया जा रहा है. वसुंधरा गुट चाहती है कि राजस्थान का चुनावी रण पूर्व मुख्यमंत्री के चेहरे को सामने रखकर लड़ा जाए.

बीजेपी नये प्लान के साथ चुनावी मैदान पर

बीजेपी नेता और राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां प्रदेश में एक्टिव नजर आ रहे हैं. उनके द्वारा पूरे प्रदेश में बूथ-बूथ तक बीजेपी को पहुंचाने का काम किया जा रहा है और पार्टी को आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है. यहां चर्चा कर दें कि पिछले चार साल में भाजपा अध्यक्ष रहते हुए सतीश पूनियां ने पार्टी को मजबूत करने के लिए कई काम किये. उन्होंने पन्ना प्रमुख और बूथ को मजबूत करने को लेकर ताकत झोंक दी जिसका लाभ भाजपा को मिलने की संभावना जतायी जा रही है.

इधर, भाजपा की ओर से चुनाव प्रभारी बनाये गये प्रह्लाद जोशी राजस्थान बीजेपी को एक्टिव करने में लग चुके हैं. उन्होंने अपनी बैठक में कार्यकर्ताओं को नया टास्क दिया है. राजस्थान में जितने पन्ना प्रमुख है वो अब पांच लोगों की टोली बनाने का काम करेंगे. भाजपा ऐसा करके सीधे मतदाता से जुड़ना चाहती है. इस मिशन पर लगने के लिए कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को बोला गया है. इसे माइक्रो से भी माइक्रो चुनावी मैनेजमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. सतीश पूनियां के काम को ही आगे बढ़ाते हुए सीपी जोशी की निगरानी में यह अभियान भाजपा शुरू करने जा रही है. अभियान के लिए जल्द ही जिलेवार नेताओं की जिम्मेदारी तय करने का काम पार्टी करेगी.

2018 में कांग्रेस ने सरकार बनायी

पिछला चुनाव की बात करें तो साल 2018 में कांग्रेस ने राजस्थान में सरकार बनायी थी. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी को कुल 99 सीटों पर जीत मिली है, जबकि बीजेपी 73 सीट ही सिमट गयी थी. ट्रेंड के अनुसार इस साल भाजपा की वसुंधरा सरकार चुनाव हार गयी और जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जताया. इसके अलावा बीएसपी को 6, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्‍ससिस्‍ट) को 2, भारतीय ट्रायबल पार्टी को 2, राष्ट्रीय लोक दल को एक, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को 3 और निर्दलीयों उम्मीदवार को 13 सीटों पर जीत मिली थी.

राजस्थान का ट्रेंड

यदि हम पिछले 20 साल में राजस्थान में हुए चार विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में सफल होती नजर नहीं आयी. सत्ताधारी पार्टी के विधायक दोबारा चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उनमें से ज्यादातर को जनता नकार देती है. जनता का सबसे ज्यादा गुस्सा मंत्रियों पर निकलता है, पिछली चार सरकारों में मंत्री रहे ज्यादातर नेता अगले चुनाव में हारते नजर आ चुके हैं. इसको देखकर राजस्थान का ट्रेंड आप सहज समझ सकते हैं कि प्रदेश की जनता हर पांच साल में सरकार बदल देती है. हालांकि कांग्रेस नेता ये दावा करते दिख रहे हैं कि सूबे में इस बार कांग्रेस फिर सत्ता पर काबिज होगी और राजस्थान का ट्रेंड बदलेगा.

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