अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच ‘छत्तीस के आंकड़े’ का हल ‘छत्तीसगढ़ फॉर्मूले’ से निकालेगी कांग्रेस ?

7

राजस्‍थान और छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इससे पहले कांग्रेस सभी संकट से निकलने की तैयारी कर रही है. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की अंदरूनी कलह को सुलझाने के बाद अब पार्टी राजस्थान में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करना चाहती है. हालांकि राजस्थान में गुटबंदी और अंदरूनी कलह से जूझ रही कांग्रेस के लिए यहां इस चुनौती से छुटकारा पाना आसान काम नहीं है.

आपको बता दें कि कांग्रेस ने पिछले दिनों विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ का संकट टाल लिया है. पार्टी ने भूपेश बघेल सरकार में टीएस सिंहदेव को डिप्टी सीएम बना दिया है जिससे यहां का मामला शांत होता नजर आ रहा है. कांग्रेस के इस फैसले के बाद जो सिंह देव की प्रतिक्रिया आयी, उससे लोग इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि भविष्य में कांग्रेस छत्तीसगढ़ में एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी. छत्तीसगढ़ के बाद कांग्रेस की नजर राजस्थान पर टिक चुकी हैं, कांग्रेस यहां भी उसी तरह संकट को साधने का प्रयास कर रही है.

छत्तीसगढ़ वाला फॉर्मूला लगा सकती है कांग्रेस

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि कांग्रेस राजस्थान में भी छत्तीसगढ़ वाला फॉर्मूला लगाने की तैयारी में है. खबरों की मानें तो कांग्रेस राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ‘छत्तीस का आंकड़ा’ रखने वाले सचिन पायलट को लेकर कुछ ऐसा फैसला लेगी जिससे प्रदेश में पार्टी का संकट खत्म हो जाए. कांग्रेस सरकार या पार्टी में अधिक प्रमुख भूमिका में सचिन पायलट को ला सकती है. उल्लेखनीय है कि सचिन पायलट द्वारा दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर वापस लौटने के बाद इसको लेकर कई तरह की अटकलें लगायी जा रही है. सचिन पायलट खुद तो कुछ नहीं बोल रहे है, लेकिन वे अपने समर्थकों के साथ लगातार मुलाकात कर रहे हैं. सचिन पायलट ने मीडिया से बचते भी नजर आ रहे हैं.

छत्तीसगढ़ से अलग है राजस्थान की लड़ाई

जब से कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में बदलाव किया है तब से जयपुर में कई तरह की चर्चा हो रही है. कांग्रेस को छत्तीसगढ़ की तुलना में राजस्थान में ज्यादा माथापच्ची करनी होगी. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि छत्तीसगढ़ में शीत युद्ध के बावजूद, बघेल और सिंह देव ने सभ्यता का परिचय दिया और एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमलों से परहेज करते रहे. इसके इतर सचिन पायलट जहां अपनी ही सरकार के खिलाफ कई मंचों पर बोल चुके हैं. वहीं सीएम अशोक गहलोत भी सचिन पायलट के खिलाफ कड़े शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं. यही नहीं राजस्थान में सचिन पायलट 2020 में 18 विधायकों के साथ विद्रोह कर चुके हैं.

Source link

Get real time updates directly on you device, subscribe now.