Mann Ki Baat 104th Episode: पीएम मोदी आज करेंगे ‘मन की बात’, झारखंड के इन दो गांव के ग्रामीणों से जुड़ेंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 104वें एपिसोड को संबोधित करेंगे. जिसका प्रसारण देशभर सभी रेडियो स्टेशन और न्यूज चैनलों में भी किया जाएगा.

पीएम मोदी ने ट्वीट कर मन की बात कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के बारे में जानकारी खुद दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर ट्वीट किया और बताया, सुबह 11 बजे ट्यून इन करें. भारत भर से प्रेरक जीवन यात्राओं को हाईलाइट करना हमेशा आनंददायक होता है.

30 जुलाई को हुआ था 103वें एपिसोड का प्रसारण

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 103वें एपिसोड का प्रसारण 30 जुलाई को किया गया था. जिसमें उन्होंने ‘मेरी माटी, मेरा देश’ अभियान का आगाज किया था.

गुमला के कोटेंगसेरा और लोहरदाग के मसियातु गांव के ग्रामीणों से बात करेंगे पीएम मोदी

पीएम मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में आज झारखंड के दो गांव की चर्चा करने वाले हैं. जिसमें एक गांव गुमला जिला और दूसरा लोहरदगा की हैं. झारखंड के गुमला जिले से 20 किमी दूर कोटेंगसेरा गांव है, जहां के किसान जैविक खेती से जुड़े हैं. यह सांसद एग्री स्मार्ट विलेज है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के लिए कोटेंगसेरा गांव का चयन किया है. कोटेंगसेरा मुरकुंडा पंचायत में आता है. सांसद सुदर्शन भगत ने एग्री स्मार्ट विलेज के रूप में इसका चयन किया है. आज से छह साल पहले तक यह इलाका नक्सल प्रभावित था. माओवादी, पीएलएफआइ व पहाड़ी चीता गिरोह के उग्रवादी व अपराधी आए दिन लोगों की हत्या व लूटपाट जैसी घटनाओं को अंजाम देते थे. नक्सलवाद पर नकेल के बाद ग्रामीणों ने खेती की ओर ध्यान दिया. अब जैविक खेती से ये गांव सुर्खियों में है. मुरकुंडा पंचायत के रघुनाथपुर, कोलांबी, कोटेंगसेरा व कुटमा गांव के करीब 200 किसान 80 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं. यहां मल्टी लेयर (मचान विधि) से एक ही खेत में एक साथ चार से पांच प्रकार की सब्जी की खेती की जा रही है. किसानों की सोच ने गांव की तस्वीर बदल दी है. उसी तरह लोहरदगा का मसियातु गांव है. जहां के ग्रामीण बंबू क्राफ्ट के व्यवसाया से जुड़े हैं. यह गांव लोहरदगा जिले के कुडू प्रखंड बेहद नक्सली क्षेत्र में पड़ता है. इस गांव में यह व्यवसाय पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है. इस व्यवसाय से करीब 50 परिवार जुड़े हैं.

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