स्कूल इंटीग्रेटेड प्रोग्राम में 82 करोड़ निवेश करेगा फिजिक्सवाला, गरीब बच्चों को दे रहा ऑनलाइन कोचिंग

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मुंबई : कोरोना महामारीकाल से स्कूली बच्चों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को सस्ती दरों पर ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने वाला ‘फिजिक्सवाला’ ने अब भारत में स्कूल इंटीग्रेटेड प्रोग्राम चलाने की तैयारी शुरू कर दी है. खबर है कि ऑनलाइन एजुकेशन और टेक कंपनी फिजिक्सवाला ने अपने स्कूल इंटीग्रेटेड प्रोग्राम ‘विद्यापीठ स्कूल’ में चरणबद्ध तरीके से एक करोड़ डॉलर यानी करीब 82 करोड़ रुपये के निवेश करने की योजना बनाई है. पूरे भारत भर में अभी फिजिक्सवाला का यह प्रोग्राम 39 स्कूलों में चल रहा है.

बिहार-झारखंड समेत 10 राज्यों मे चल रहा प्रोग्राम

फिजिक्सवाला के उपाध्यक्ष इमरान राशिद ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि विद्यापीठ स्कूल सेंटर एक स्कूल इंटीग्रेटेड प्रोग्राम है. इसमें सीबीएसई परीक्षा, जेईई और नीट की तैयारी के लिए आवश्यक अवधारणाओं और कौशल को नियमित कक्षा निर्देशों में शामिल किया गया है. इससे छात्रों को अलग से कोचिंग लेने की जरूरत नहीं पड़ती. उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, असम, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा समेत देश के 10 राज्यों के 34 जिलों के 39 स्कूलों में चलाया जा रहा है.

स्कूलों के बुनियादी ढांचा विकास में पैसे होंगे खर्च

इमरान राशिद ने मीडिया को बताया कि हमारी योजना चरणबद्ध तरीके से एक करोड़ डॉलर निवेश करने की है, जिसमें से 50 लाख डॉलर का इस्तेमाल स्कूलों में बुनियादी ढांचा विकास में और बाकी के 50 लाख डॉलर का इस्तेमाल उत्तम श्रेणी की सामग्री तैयार करने में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कंपनी की योजना 2025-26 तक 300 स्कूलों में विद्यापीठ प्रोग्राम शुरू करने की है. वह दूरदराज के क्षेत्रों में तीसरी से पांचवी श्रेणी के शहरों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विस्तार करना चाहती है.

कोरोनाकाल में गरीब बच्चों का संबल बना फिजिक्सवाला

बताते चलें कि चीन से निकलकर पूरी दुनिया में फैले कोरोना महामारी के दौरान भारत में जब स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग सेंटरों समेत तमाम व्यावसायिक गतिविधियां और आम जनजीवन ठप हो गया था, तब फिजिक्सवाला ने यूट्यूब के जरिए कम पैसों में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देना शुरू किया. अच्छी पढ़ाई और पढ़ाई के अच्छे नतीजे आने की वजह से यह स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों में काफी लोकप्रिय हो गया. एक प्रकार से कोचिंग के नाम पर सालाना हजारों और लाखों रुपये बटारने वाले संस्थानों के मुकाबले कम खर्च में विषय विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के मामले में यह अधिक लोकप्रिय हुआ और गरीब एवं आर्थिक तौर पर कमजोर बच्चों और अभिभावकों के लिए संबल बना.

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