Onion Price: अब नहीं रुलाएगा प्याज! मोदी सरकार ने लिया यह बड़ा फैसला

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onion price: टमाटर की कीमतें बाजार में अब कम होती नजर आ रही है. इस बीच प्याज की कीमतें बढ़ने की आशंका के मद्देनजर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने मूल्य वृद्धि पर अंकुश लगाने और घरेलू बाजार में आपूर्ति में सुधार के लिए शनिवार को प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाने का काम किया है. वित्त मंत्रालय ने इस बाबत एक अधिसूचना जारी की है जिसमें कहा गया है कि 31 दिसंबर, 2023 तक प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया है. निर्यात शुल्क इन खबरों के बीच लगाया गया है कि सितंबर में प्याज की कीमतें बढ़ने की आशंका है.

कीमतों पर अंकुश के लिए ‘बफर स्टॉक’ से प्याज जारी करेगी सरकार

इससे पहले खबर आयी थी कि केंद्र की मोदी सरकार अपने ‘बफर स्टॉक’ से टारगेट एरिया को प्याज जारी करेगी. यह कदम अक्टूबर से नई फसल की आवक शुरू होने से पहले कीमतों को नियंत्रण में रखने के मकसद से उठाया गया है. सरकार बफर स्टॉक से प्याज जारी करने के लिए कई विकल्प तलाशने का काम कर रही थी जिसके तहत आज फैसला लिया गया और स्थानीय आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया.

‘बफर स्टॉक’ से प्याज जारी किया जाएगा. इसमें ई-नीलामी, ई-कॉमर्स के साथ-साथ राज्यों के माध्यम से उनकी उपभोक्ता सहकारी समितियों तथा खुदरा दुकानों से रियायती दरों पर बिक्री शामिल है. सरकार ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत तीन लाख टन प्याज रखा है. कम आपूर्ति वाले सीजन के दौरान दाम बढ़ने पर सरकार इस प्याज को जारी करती है.

प्याज कीमत भी थोड़ा बढ़ रही हैं

सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो, प्याज कीमतें भी अब थोड़ा बढ़ रही हैं. दस अगस्त को प्याज की देश में खुदरा कीमत 27.90 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो कि एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में दो रुपये अधिक है.उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा था कि हम तत्काल प्रभाव से ‘बफर स्टॉक’ से प्याज देंगे. उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) के अधिकारियों के साथ 10 अगस्त को हुई चर्चा के बाद प्याज के निपटान के तौर-तरीकों को अंतिम रूप दिया गया.

यहां चर्चा कर दें कि अप्रैल-जून के दौरान रबी प्याज का देश के कुल उत्पादन में 65 प्रतिशत हिस्सा है. ये अक्टूबर-नवंबर में खरीफ फसल की कटाई होने तक उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करते हैं.

भाषा इनपुट के साथ

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