दिल्ली में अब चलेगी 2 तरह की मेट्रो, यात्री 3 कोच की ट्रेन में भी कर सकेंगे सफर

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नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल निगम की ट्रेनें वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर के 40 लाख से अधिक लोगों के लिए लाइफलाइन बन चुकी हैं। इसी के साथ अपने सफर के साथ DMRC लगातार अपनी सुविधाओं में भी इजाफा करता जा रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली के साथ एनसीआर के यात्रियों को भी बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। दरअसल, दिल्ली में अब लोग 4 कोच वाली मेट्रो ट्रेन के साथ 3 कोच वाली लाइट मेट्रो में भी सफर कर सकेंगे। यह दिल्ली-एनसीआर के लोगों के अलग ही अनुभव होगा, क्योंकि पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से मेट्रो यात्री 4 कोच वाली मेट्रो में ही सफर कर रहे हैं।

अब मेट्रो के चौथे फेज में तीन कॉरिडोर में से सिर्फ रिठाला-बवाना-नरेला रूट पर लाइट मेट्रो (Light Metro or Metro Light) चलेगी, जबकि तीन में बाकी 2 कॉरिडोर पर 4 कोच वाली मेट्रो ही संचालित होगी। इसके न केवल DMRC को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि लोगों को मेट्रो लाइट में सफर का अनुभव हासिल होगा। हो सकता है कि इसमें किराया भी कम हो, हालांकि DMRC अधिकारियों का कहना है कि किराया तय करने का काम आखिरी चरण में होना है, ऐसे में अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता।

तीन में एक कॉरिडोर पर ही तीन कोच वाली लाइट मेट्रो के चलने का खुलासा दिल्ली मेट्रो रेल निगम की ओर से बनाई गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (Detail Project Report) में हुआ है। यह रिपोर्ट केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के निर्देश पर बनाई गई है। दरअसल, केंद्र सरकार के निर्देश पर बनी DMRC की डीपीआर में संशोधन किया है, जिसमें तीन में से एक कॉरिडोर पर लाइट मेट्रो और 3 पर 4 कोच वाली सामान्य मेट्रो ट्रेन चलाने की बात कही गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक, संशोधित डीपीआर में 21.73 लंबे कॉरिडोर (रिठाला-बवाना-नरेला) पर ही लाइट मेट्रो दौड़ाने की बात का जिक्र है। इसके अलावा बाकी बचे 2 कॉरिडोर पर लाजपतनगर से साकेत जी ब्लॉक और इंद्रप्रस्थ से इंद्रलोक कॉरिडोर यह तीन कोच वाली लाइट मेट्रो की चर्चा पर कहा गया है कि यहां पर लाइट मेट्रो चलाना संभव नहीं है। शायद ऐसा ज्यादा भीड़भाड़ वाले कॉरिडोर के चलते किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि यह डीपीआर फिलहाल दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी सरकार के पास है, लेकिन इसके मार्च से पहले मंजूरी मिलने के आसार कम हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह दिल्ली विधानसभा चुनाव-2020 है। दरअसल, दिल्ली में 7 जनवरी से चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। ऐसे में अब दिल्ली में नई सरकार ही इस डीपीआर पर निर्णय लेगी। दिल्ली सरकार की मंजूरी के बाद ही इसे केंद्र सरकार के भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी के बाद इस पर काम शुरू हो सकेगा।

मेट्रो के स्थान पर मेट्रो लाइट या लाइट मेट्रो के निर्माण में लागत 40-50 फीसद कम आती है। इसी के साथ इसके संचालन पर भी तुलनात्मक रूप से कम खर्च आता है। लाइट मेट्रो के निर्माण से आर्थिक घाटा तो कम होगा ही, साथ ही जमीन भी कम अधिगृहीत करनी पड़ेगा, जिससे लागत पर सीधा-सीधा प्रभाव पड़ता है। सामान्य मेट्रो स्टेशन की तरह लाइट मेट्रो में बस स्टॉप जैसी व्यवस्था होती है, जिससे लागत कम आती है। लाइट मेट्रो जमीन पर ही कोलकाता में चलने वाली ट्राम की जैसी है।