Zerodha के फाउंडर नितिन कामथ ने IPO में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को सराहा, बाजार पर कही महत्वपूर्ण बात

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Zerodha: भारतीय शेयर बाजार के लिए ये सप्ताह काफी उत्साह से भरा रहा है. ‍NSE पर इस साल पांच आईपीओ की लिस्टिंग हुई. इसमें टाटा टेक्नोलॉजी (Tata Technology) के आईपीओ ने बड़ा रिकार्ड बनाया है. कंपनी के आईपीओ के लिए 73.5 लाख लोगों ने आवेदन किया. आईपीओ में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए, ज़ेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ निवेशकों की काफी सराहना की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लंबे समय के बाद आईपीओ बाजार में बड़े पैमाने पर गतिविधि कैसे शुरू हुई, एनएसई पर ₹7,600 करोड़ के आईपीओ ने धूम मचा दी. इस सप्ताह लॉच हुई लगभग आईपीओ को बाजार से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. इसका असर बाजार में भी देखने के लिए मिला. देश की शीर्ष 10 मूल्यवान कंपनियों में से चार का सम्मिलित रूप से बाजार मूल्यांकन पिछले सप्ताह 65,671.35 करोड़ रुपये बढ़ गया. रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे अधिक लाभ में रही. बीएसई के मानक सूचकांक सेंसेक्स में पिछले सप्ताह 175.31 अंक यानी 0.26 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया.

नितिन कामथ ने क्या कहा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईटी अखबार की एक खबर को शेयर करते हुए नितिन कामथ ने कहा कि लंबे समय के बाद, हमने आईपीओ बाजार में बड़े पैमाने पर गतिविधि देखी है, 7.6 हजार करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए बैंक खातों में 2.6 लाख करोड़ रुपये अवरुद्ध हैं. यदि यह 2003 होता, तो इसमें 16 कार्य दिवस (या ~ 1 महीना) लगते, और पूरा पैसा निवेश बैंकरों के पास चला जाता और निवेशकों को कम से कम 0.5% (6% प्रति वर्ष मानकर) या 1300 करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ता. T+16, T+12, T+6 हो गया और सितंबर 2023 से यह T+3 (~1सप्ताह) है. अब, आवंटन तक पैसा कभी भी बैंक खाते से नहीं निकलता. जबकि संस्थागत निवेशक चालू बैंक खातों में अवरुद्ध धन के साथ ब्याज आय से चूक सकते हैं, जिसमें उन 3 दिनों के लिए कोई ब्याज नहीं मिलता है, खुदरा निवेशक आईपीओ प्रक्रिया के दौरान अपने बचत खातों से ब्याज अर्जित करना जारी रखते हैं. लगभग हर पहलू में, भारत में पूंजी बाजार नियमों में पिछले 20 वर्षों में, विशेषकर पिछले पांच वर्षों में अभूतपूर्व सुधार हुआ है.

एफपीआई का रुख बदला, नवंबर में 378 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने नवंबर में भारतीय शेयरों में 378 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया. इसका मुख्य कारण अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट है. आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने अक्टूबर में 24,548 करोड़ रुपये और सितंबर में 14,767 करोड़ रुपये मूल्य की भारतीय इक्विटी की बिकवाली की थी. इससे पहले एफपीआई मार्च से अगस्त तक पिछले छह महीनों में लगातार भारतीय शेयर खरीद रहे थे. इस अवधि में 1.74 लाख करोड़ रुपये की खरीद हुई. कुल मिलाकर 2023 के लिए संचयी रुझान अच्छा बना हुआ है. इस वित्त वर्ष में अभी तक एफपीआई ने 96,340 करोड़ रुपये का निवेश किया है. यस सिक्योरिटीज इंडिया में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च के रणनीतिकार हितेश जैन ने कहा कि हमारा मानना है कि आने वाले समय में ईएम (उभरते बाजारों) में जोखिम उठाने की क्षमता में सुधार तथा अमेरिका में जोखिम-मुक्त प्रतिफल में गिरावट से एफपीआई भारत की ओर आकर्षित होंगे. आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस महीने (24 नवंबर तक) भारतीय शेयरों में 378.2 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया. विदेशी निवेशक इस महीने चार दिन लिवाल रहे और शुक्रवार को 2,625 करोड़ रुपये की बड़ी खरीदारी की. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा कि अक्टूबर के मध्य में अमेरिका में मुद्रास्फीति में उम्मीद से बेहतर गिरावट ने बाजार को यह मानने का विश्वास दिला दिया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दरों में बढ़ोतरी कर दी है. इसके परिणाम स्वरूप अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी से गिरावट आई है और 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड प्रतिफल अक्टूबर मध्य में पांच प्रतिशत से घटकर अब 4.40 प्रतिशत हो गया.

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