नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने पर बवाल जारी, संजय राउत ने मोदी सरकार पर निशाना साधा

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दिल्ली के तीन मूर्ति भवन परिसर में स्थित नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय सोसाइटी (एनएमएमएल) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय सोसाइटी कर दिया गया है. इसको लेकर विपक्षी दल लगातार विरोध कर रहे हैं. एक ओर कांग्रेस और बीजेपी के बीच वाकयुद्ध जारी है, तो दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट के नेता और सांसद संजय राउत ने भी मोदी सरकार पर हमला किया है.

संजय राउत ने नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने को ठहराया गलत

उद्धव ठाकरे गुट के नेता और सांसद संजय राउत ने नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मैं मानता हूं कि दूसरे पीएम के योगदान को दिखाया जाना चाहिए. एक खंड बनाया जा सकता है जहां अन्य प्रधानमंत्रियों के योगदान को प्रदर्शित किया जा सकता है लेकिन संग्रहालय का नाम बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है.

एनएमएमएल का नाम बदलने को कांग्रेस ने संकीर्ण सोच और प्रतिशोध बताया

कांग्रेस ने एनएमएमएल का नाम बदले जाने को लेकर केंद्र सरकार पर संकीर्ण सोच और प्रतिशोध से काम करने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने कहा, इमारतों के नाम बदलने से विरासतें नहीं मिटा करतीं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसको लेकर ट्वीट किया था. जिसमें उन्होंने लिखा था, जिनका कोई इतिहास ही नहीं है, वे दूसरों के इतिहास को मिटाने चले हैं. नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय का नाम बदलने के कुत्सित प्रयास से, आधुनिक भारत के शिल्पकार व लोकतंत्र के निर्भीक प्रहरी पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की शख्सियत को कम नहीं किया जा सकता. इससे केवल भाजपा-आरएसएस की ओछी मानसिकता और तानाशाही रवैये का परिचय मिलता है.

बीजेपी ने खरगे को दिया तगड़ा जवाब

इधर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बीजेपी ने तगड़ा जवाब दिया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने एक ट्वीट कर खरगे पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को एक परिवार के अलावा कुछ और दिखाई ही नहीं देता, उनके द्वारा इस तरह का बड़बोलापन उनकी ओछी मानसिकता व पाखंड की पराकाष्ठा है.

नेहरू तीन मूर्ति हाउस में 16 से अधिक साल तक रहे

‘आजादी का अमृत महोत्सव’ की वेबसाइट के अनुसार, पंडित नेहरू 27 मई, 1964 को अपने निधन तक 16 से अधिक साल तक यहां रहे. यह इमारत जवाहरलाल नेहरू के नाम से इतनी लोकप्रिय थी कि तीन मूर्ति हाउस और जवाहरलाल नेहरू कमोबेश पर्यायवाची बन गए, इसलिए उनके निधन के बाद, भारत सरकार ने ज्ञान की सीमाओं को बढ़ाने और मानव मस्तिष्क को समृद्ध करने के नेहरू के शाश्वत उत्साह को बनाए रखने के लिए इस आवास को एक उपयुक्त स्मारक में बदलने का फैसला किया.

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