राजस्थान : ‘मैं किसी खास जाति या धर्म का नेता नहीं’, बोले सचिन पायलट

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कांग्रेस नेता सचिन पायलट सोमवार को महापुरा में जन संघर्ष यात्रा कर रहे हैं. आज यात्रा का पांचवा और आखिरी दिन है जिसमें बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी है. यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने एक निजी चैनल से बात की और कहा कि अगला विधानसभा चुनाव किसने नेतृत्व में लड़ा जाएगा ये पार्टी तय करेगी. चुनाव पर फैसला पार्टी लेगी.

जब उनसे सवाल किया गया कि आप गुर्जर के नेता है…आपको इस जाति का समर्थन प्राप्त है ? इसपर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि मैं किसी खास जाति या धर्म का नेता नहीं हूं. हर कोई किसी ना किसी जाति या धर्म में जन्म लेता है, इसका मतलब ये नहीं कि उसे उसी दायरे में बांधकर रखा जाए. मैं किसी जाति या धर्म विशेष का नेता नहीं हूं. मैं सभी का नेता हूं. यह यात्रा मैंने जनता के लिए निकाला है.

मेरा मुद्दा भ्रष्टाचार है कोई व्यक्ति नहीं

आगे कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि राज्य सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, हमारे पास अभी भी 6 महीने का समय है. आगामी राज्य चुनावों के मद्देनजर राजस्थान कांग्रेस में यूनिटी पर सचिन पायलट ने कहा कि न तो मैं किसी पर आरोप लगाता हूं और न ही व्यक्तिगत स्तर पर मेरा किसी से कोई मतभेद है. कर्नाटक में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही हम लड़े और जीते…मेरा मुद्दा भ्रष्टाचार है कोई व्यक्ति नहीं है.

दबाव बनाने की रणनीति

राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि भ्रष्टाचार और पेपर लीक समेत जिन मुद्दों पर उन्होंने अपनी ‘जन संघर्ष यात्रा’ शुरू की उन्हें प्रदेश की जनता ने स्वीकार किया है. आपको बता दें कि कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने अजमेर से पांच दिवसीय यात्रा शुरू की है जिसका आज अंतिम दिन है. यात्रा सोमवार को जयपुर पहुंचेगी. यात्रा को राजस्थान में इस चुनावी साल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.

साल के आखिर में विधानसभा चुनाव

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस दोबारा सत्ता में लौटने की उम्मीद कर रही है. अशोक गहलोत द्वारा 2020 में बगावत में शामिल विधायकों पर भाजपा से पैसे लेने का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद यह यात्रा निकाली जा रही है. पायलट और 18 अन्य कांग्रेस विधायकों ने उस समय राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की मांग की थी.

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