Mughal Gardens Open: …फिर छिड़ी बात फूलों से लदी डालियों की, तो चलें आए मुगल गार्डन

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Mughal Garden अब मौसम की इस अंगड़ाई के साथ मुगल गार्डन छठा भी बदल गई। कली…फूलों से लदी डालियां आपको आकर्षित करने लगी हैं। दिल्ली का मुगल गार्डन अपनी बाहें फैलाए फूलों से स्वागत कर रहा है। दुनिया भर के फूलों की किस्म और खुशबू को समेटे मुगल गार्डन को देखें तो पता चलता है कि इसे यूं ही राष्ट्रपति भवन की आत्मा नहीं कहा जाता।

यहां की फिजा में बात ही कुछ ऐसी है कि रूह को ठंडक देती है। इसका कारण है, यहां फूल ही नहीं, फूलों के साथ यादें हैं, उनकी खुशबू में लिपटे इतिहास के पन्नों के सुनहरे अंश हैं, दुनिया से रुखसत हुई नायाब शख्सियतों की मौजूदगी का अहसास है, प्रकृति और ज्यामिती के संगम का शानदार नजारा है, बेहतरीन वास्तुशिल्प बेजोड़ नमूना है। चहुओर फूलों की सुंदरता और माहौल में नैसर्गिक आकर्षण है।


हर्बल गार्डन का नजारा: कोरोना का प्रभाव मुगल गार्डन की खूबसूरती पर भी हल्का सा नजर आ रहा है। तभी इस बार यहां नीदरलैंड्स से लाए जाने वाले ट्यूलिप नहीं खिल सके हैं। जिसकी खूबसूरती हर वर्ष सबसे ज्यादा आकर्षित करती थी। खैर, ट्यूलिप नहीं है तो क्या हुआ हर्बल गार्डन की खूबसूरती का नजारा ले सकते हैं, पहले से भी समृद्ध और बेहतरीन औषधीय पौधों के गुण समेटे यह हिस्सा आकर्षण का केंद्र बनता है। पूर्व राष्ट्रपति डा. अब्दुल कलाम ने 2002 में इस गार्डन की शुरुआत की थी। यहां पर 33 औषधीय पौधे हैं। योग, आयुर्वेद, यूनानी, नेचुरौपैथी, होम्योपैथी में काम आने वाले इन पौधों को आयुष वेलनेस सेंटर की तरफ से भी सराहा जाता है।

फूलों से लदी डालियां…कैसी रिझा रही हैं…इस बार मुगल गार्डन में ट्यूलिप की कमी को सनेरिया फूल नहीं खलने देगा…।

संगीत की लय पर इठलाती जल तरंगें: लोगों को मुगल गार्डन का यह हिस्सा काफी पसंद आता है। इस हिस्से में लगे तीन विशालकाय फव्वारे संगीत की लय पर चलते हैं। रंगीन रोशनी और संगीत की धुनों के साथ नृत्य करती जल तरंगें मन मोह लेती हैं। इसके अलावा गोलाकार गार्डन में बेहतरीन गालोकार फव्वारा लगा है और उसके बीच स्थित तालाब में खूबसूरत कमल खिले हुए हैं। किनारों पर सूरजमुखी और गेंदे के फूल से सजावट है।