लॉकडाउन के कारण रमजान में भी बंद रहेंगी मस्जिदें, घरों में ही पढ़ी जाएगी तरावीह की नमाज

206

इस महीने में मुस्लिम दिन में रोजा रखते हैं और रात के वक्त मस्जिदों में तरावही की नमाज पढ़ते हैं। इस महीने में अगर कोई शख्स एक नेक काम करता है तो खुदा उसे 70 गुना सवाब देते हैं।

दिल्ली न्यूज़ 24 रिपोर्टर(अमित लाल)। रमजान उल मुबारक का महीना शुरू होने वाला है। लॉकडाउन की वजह से रमजान में भी राजधानी की सभी मस्जिदें बंद रहेंगी। रमजान में रात के वक्त होने वाली तराहीव की नमाज भी इस बार लोग घरों में ही पढ़ेंगे। मुस्लिम सयुदाय के लोग अभी से ही रमजान की तैयारियों में जुट गए हैं। कोरोना वायरस की वजह से इस बार रोजेदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 24 अप्रैल से रमजान शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम डॉ. मुफ्ती मुकर्रम ने बताया कि रमजान इस्लामिक कलैंडर के एक महीने का नाम है। 24 अप्रैल को रमजान का चांद नजर आ सकता है, 25 को पहला रोजा होगा। उन्होंने कहा यह महीना सबसे ज्यादा बरकत वाला होता है।

इस महीने में मुस्लिम दिन में रोजा रखते हैं और रात के वक्त मस्जिदों में तरावही की नमाज पढ़ते हैं। इस महीने में अगर कोई शख्स एक नेक काम करता है तो खुदा उसे 70 गुना सवाब देते हैं। पूरा विश्व कोरोना माहमारी से जूझ रहा है, लॉकडाउन का आदेश होते ही मस्जिदों को बंद कर दिया गया था।

3 मई तक लॉकडाउन रहेगा, इस बीच रमजान शुरू हो जाएगा। लॉकडाउन की अवधि तक मस्जिदें पूरी तरह बंद ही रहेंगी। उन्होंने कहा कि वह लोगों से अपील कर रहे है कि लोग अपने घरों में रहकर ही तारावीह की नमाज पढ़े। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग रमजान के महीने में अपने घर में लोगों को जमा करके तारावीह की नमाज पढ़वाते हैं, कोरोना के कारण इस रमजान ऐसा कुछ न करें। कोरोना को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग के जो दिशा निर्देश हैं उनका पालन करें।

तड़के और शाम को भी दुकानें खोलने की अपील

मुफ्ती मुकर्रम ने कहा कि रमजान के महीने में रोजेदार पूरे दिन भूखा-प्यासा रहता है। रोजेदार सूरज निकलने से पहले सहरी (खाना) खाता है, इसके बाद सूरज डूबने पर इफ्तार करके रोजा खोलता है। लॉकडाउन की वजह से होटल व ढ़ाबे बंद हैं। दुकानें खुलने का समय भी निर्धारित किया हुआ है।

उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की रोजेदार सुबह और शाम के वक्त खाना खाते हैं, ऐसे में सुबह सवेरे और शाम को भी फल व किराने की दुकानें खुलवाई जाएं। उन्होंने कहा मौजूदा वक्त में परिस्थितियां दूसरी हैं, बहुत से मजदूर व कारीगर होटल व ढ़ाबों पर खाना खाते थे। अब सरकार की ओर से जो खाना स्कूलों में मिल रहा है वह खा रहे हैं, अगर रमजान में वह रोजा रखते हैं तो सुबह सवेरे खाना कहा से लाएंगे। इससे बेहतर यह होगा कि वह लॉकडाउन खुलने के बाद से रोजा रखना शुरू करें।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.