Manipur Violence: पीएम मोदी की खामोशी पर सवाल! कांग्रेस समेत 10 विपक्षी दलों ने सौंपा ज्ञापन

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मणिपुर हिंसा को लेकर कांग्रेस समेत 10 विपक्षी दलों ने अमेरिका के लिए रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन सौपने वाले दलों में कांग्रेस, आप, टीएमसी, एनसीपी, सीपीआईएम, शिवसेना उद्धव गुट समेत सामान विचारधारा वाले कई अन्य दल शामिल हैं.

विपक्ष ने बीजेपी पर बांटो और राज करो की राजनीति करने का आरोप लगाया है

पत्र में मणिपुर में हिंसा को रोकने में विफल रहने के लिए केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया है. विपक्ष ने बीजेपी पर बांटो और राज करो की राजनीति करने का आरोप लगाया है. विपक्षी दलों ने मणिपुर के मुख्यमंत्री को वर्तमान जातीय हिंसा जिम्मेदार बताया है. साथ ही कहा कि अगर राज्य के मुख्यमंत्री ने सही वक्त पर उचित कदम उठाया होता और तत्काल कार्रवाई की होती तो इस हिंसा को टाला जा सकता था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी की आलोचना

विपक्ष के पत्र में हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी की आलोचना की गई है. साथ ही कहा गया है कि गृहमंत्री के राज्य के दौरे से हालात में कोई फर्क नहीं आया है. पीएम की लगातार चुप्पी मणिपुर को नुकसान पहुंचा रही है और अगर पीएम शांति की अपील करेंगे तो हमें उम्मीद है कि राज्य के हालात में सुधार होगा.

मणिपुर के मुद्दे को एक राष्ट्रीय मुद्दा माना जाना चाहिए- मणिपुर कांग्रेस 

इधर मणिपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ओकराम इबोबी सिंह ने एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा- “मणिपुर के मुद्दे को एक राष्ट्रीय मुद्दा माना जाना चाहिए. सीएम बीरेन सिंह खुले तौर पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हैं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना कानून व्यवस्था की पूरी तरह से विफल होने के कारण हुई और केंद्र सरकार को यह तय करने दें कि इसके बारे में क्या किया जाना चाहिए. अगर सरकार दृढ़ संकल्प रखती है, तो इस तरह की स्थिति को 3-4 दिनों में नियंत्रित किया जा सकता है या एक सप्ताह तक कम किया जा सकता है”.

हिंसा “विशुद्ध रूप से कानून-व्यवस्था का मुद्दा”- सुप्रीम कोर्ट 

वहीं इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मणिपुर में हिंसा “विशुद्ध रूप से कानून-व्यवस्था का मुद्दा” है, क्योंकि उसने राज्य में कुकी लोगों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती और हमला करने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाने की याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

मणिपुर में क्यों भड़की हिंसा?

आपको बाताएं कि , प्रभावी और राजनीतिक रूप से मजबूत मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने पर विचार करने के लिए उच्च न्यायालय के एक विवादास्पद आदेश के विरोध में एक आदिवासी कुकी समूह द्वारा एक रैली ने मई में दो समुदायों के बीच हिंसा की लहर छेड़ दी. हिंसा में 310 से अधिक घायल हुए हैं और 40,000 विस्थापित हुए हैं. 27 मार्च को, उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मेइती समुदाय द्वारा एसटी दर्जे की मांग पर केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक सिफारिश भेजने पर विचार करे.

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