Expainer : महाराष्ट्र की सियासत में हाईवोल्टेज ड्रामा, 2019 के विधानसभा चुनाव से ही टूट रहीं हैं पार्टियां

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Maharashtra Political Crisis : महाराष्ट्र की राजनीति में हाईवोल्टेज ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रही है. साल 2022 के जून महीने में शिवसेना टूट गई थी. इसके ठीक करीब सवा साल बाद तीन जुलाई, 2023 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी दोफाड़ हो गई. दरअसल, 10 जून, 2023 को एनसीपी प्रमुख शरद पवार द्वारा बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद से ही भतीजे अजित पवार नाराज चल रहे थे. शरद पवार के भतीजे अजित पवार और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने रविवार को बगावती रुख अपना दिया और सोमवार को पार्टी दोफाड़ हो गई. सही मायने में देखा जाए, तो महाराष्ट्र की राजनीति में हाईवोल्टेज ड्रामा आज कोई नया नहीं है, बल्कि वर्ष 2019 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से ही ये अनवरत जारी है.

2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को मिली जीत

बताते चलें कि महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 21 अक्टूबर, 2019 को चुनाव कराया गया था और 24 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए गए थे. इस चुनाव में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ था. सरकार गठन पर मतभेदों के बाद शिवसेना ने भाजपा के साथ किए गए चुनावपूर्व गठबंधन को तोड़ दिया, जिससे महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट पैदा हो गया. चूंकि, चुनाव के तुरंत बाद महाराष्ट्र की कोई भी पार्टी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाई, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.

जब 23 नवंबर 2019 की अहले सुबह देवेंद्र फडणवीस ने ली शपथ

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 23 नवंबर 2019 की अहले सुबह भाजपा के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. हालांकि, इन दोनों ने नेताओं ने विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने से पहले ही 26 नवंबर 2019 को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया और 28 नवंबर 2019 को शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के एक नए गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए ) का उदय हुआ. एमवीए ने तत्कालीन शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाई.

हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद एकनाथ शिंदे बने महाराष्ट्र के सीएम

विधानसभा चुनाव के महाराष्ट्र की राजनीति में होने वाला हाईवोल्टेज ड्रामा राज्य में महा विकास अघाड़ी की सरकार बनने के बाद थम नहीं गया, बल्कि करीब पौने तीन साल बाद 21 जून 2022 को तत्कालीन शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे बागी हो गए. एकनाथ शिंदे कभी ठाकरे पर‍िवार के बेहद करीबी माने जाते थे. उनकी कुर्सी पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास ही लगती थी, लेकिन वही एकनाथ श‍िंदे जब बागी हुए, तो उद्धव सरकार के लिए मुसीबत खड़ी हो गई. करीब सात-आठ दिनों तक चले हाईवोल्टेज ड्रामा के बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को 29 जून, 2022 को अपने पद से इस्तीफा दे देना पड़ा और 30 जून, 2023 को एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण किया.

तो क्या 23 नवंबर 2019 के ड्रामे के पीछे शरद पवार का था दिमाग

मीडिया की रिपोर्ट की मानें, तो महाराष्‍ट्र की राजनीति‍ में 23 नवंबर, 2019 की अहले सुबह देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री के तौर पर और अजित पवार को उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण समारोह के हाई वोल्टेज ड्रामे के पीछे एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का ही द‍िमाग था. रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्‍ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के डबल गेम खेलने के आरोपों के बाद अपने जवाब में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने अभी हाल ही में इस बात को स्वीकार किया है. उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि 2019 में सत्ता संघर्ष के बीच उन्होंने एक गुगली फेंकी थी, जिसमें देवेंद्र फडणवीस का विकेट गिर गया था. शरद पवार की स्वीकारोक्ति के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से कहा क‍ि मुझे खुशी है कि कम से कम मैं शरद पवार से सच सामने लाने में कामयाब रहा.

शरद पवार ने क्या कहा था

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभी हाल ही में कहा क‍ि सादु शिंदे मेरे एक ससुर थे. वह देश के बड़े गुगलीबाज थे. उन्होंने देश के बड़े-बड़े खिलाड़ियों के विकेट लिये थे. मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ (आईसीसी) का अध्यक्ष था. उन्होंने कहा कि भले ही मैं कभी क्रिकेट नहीं खेला, लेकिन मुझे पता है कि गुगली कैसे और कहां फेंकी जाती है. यद‍ि कोई खुद अपना विकेट देने को तैयार हो, तो इसमें गेंदबाज की गलती क्या है? उन्होंने कहा कि जब देवेंद्र फडणवीस ने सुबह शपथ ग्रहण किया, तो उसी मौके पर यह दिख गया था कि सत्ता के लिए देवेंद्र फडणवीस क्या कर सकते हैं और किस स्तर तक जा सकते हैं.

क्यों दोफाड़ हुई एनसीपी

अब जबकि तीन जुलाई, 2023 को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजित पवार और उनके खासमखास माने जाने वाले प्रफुल्ल पटेल ने खुद को एनसीपी का पदाधिकारी घोषित कर दिया है, तब अटकलें यह लगाई जा रही हैं कि 23 नवंबर, 2019 से पहले शरद पवार की ओर से फेंकी गई गुगली से महाराष्ट्र की राजनीतिक पिच पर उनकी ही पार्टी को हिटविकेट कर रही है. यही वजह है कि महाराष्ट्र में सबसे पहले महा विकास अघाड़ी में शामिल प्रमुख घटक दल शिवसेना टूटी और अब एनसीपी दोफाड़ हो गई.

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