Kuno Cheetah Death: मध्य प्रदेश के कूनो में एक और चीते की मौत, अबतक कुल 9 की गयी जान

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मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा खबर है कि वहां एक और चीते की मौत हो गई है. मध्य प्रदेश वन विभाग ने बुधवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी. हालांकि मौत की वजह के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गयी है.

मादा चीतों में से एक धात्री (तिब्लिसी) मृत पाई गई

वन विभाग ने अपने बयान में बताया गया कि आज सुबह मादा चीतों में से एक धात्री (तिब्लिसी) मृत पाई गई. मौत का कारण पता करने के लिए पोस्टमार्टम किया जा रहा है.

नामीबिया से लाई गई मादा चीते की मौत

जिस मादा चीते की मौम हुई है, उसे नामीबिया से लाया गया था. एमपी मुख्य वन्यजीव वार्डन असीम श्रीवास्तव ने कहा, केएनपी के बोमा में रखे गए सभी 14 चीते (07 नर, 06 मादा और 01 मादा शावक) स्वस्थ हैं, और कुनो वन्यजीव पशु चिकित्सकों और नामीबिया के विशेषज्ञों की टीम द्वारा उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है.

अबतक 9 चीतों की गयी जान

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पिछले 4 महीने में अबतक कुल 9 चीतों की मौत हो चुकी है. जिसमें छह चीते और तीन शावक शामिल हैं. 14 चीते जिन में से सात नर, छह मादा और एक मादा शावक को कुनो में बाड़े में रखा गया है और एक मादा बाहर है.

चीतों पर रखी जा रही निगरानी

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की लगातार हो रही मौत से वन विभाग के अधिकारी परेशान हैं. एक दल द्वारा चीतों की गहन निगरानी की जा रही है. उसे स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बाड़े में वापस लाने के प्रयास जारी हैं.

संक्रमण के कारण हाल ही में दो चीतों तेजस और सूरज की हुई थी मौत

गौरतलब है कि हाल ही में संक्रमण के कारण दो चीतों – तेजस और सूरज की मौत हुई थी. पोस्टमार्टम में मौत की वजह रेडियो कॉलर के पास संक्रमित को बताया गया था. दोनों चीतों को अफ्रीकी से भारत लाया गया था.

कूनो में चीतों की लगातार हो रही मौत से अधिकारी चिंतित

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की लगातार हो रही मौत से निगरानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं. हाल के दिनों में चीतों की मौत के बाद वन्यजीव मुख्य वार्डन जसबीर सिंह चौहान को स्थानांतरित कर दिया गया था.

चीता परियोजना पर मंडराया खतरा

कूना नेशनल पार्क में चीतों की लगातार हो रही मौत से चीता परियोजना पर खतरा मंडराने लगा है. देश में चीता लगभग विलुप्त होते जा रहे हैं. 1952 के बाद से संख्या में लगातार गिरावट आती जा रही है. चीतों को फिर से बसाने के उद्देश्य से कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और अफ्रीका से चीतों को लाया गया. लेकिन लगातार हो रही मौत से अधिकारी चिंता में पड़ गये हैं. साथ ही चीता परियोजना पर भी खतरा मंडराने लगा है.

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