कर्नाटक के 9 मंत्री करोड़पति, सभी के खिलाफ आपराधिक मामले, ADR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की अगुआई में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बन चुकी है. राज्य की 16वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को सभी नव निर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण के साथ शुरू हुआ. नयी कैबिनेट में मुख्यमंत्री को मिलाकर फिलहाल 10 मंत्री हैं. अब सिद्धारमैया की टीम को लेकर एक रिपोर्ट सामने आयी है, जिसके अनुसार सभी करोड़पति हैं. गैर-लाभकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के रिपोर्ट के अनुसार 9 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज हैं.

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सबसे धनी

कर्नाटक सरकार में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सबसे धनी मंत्री हैं. उनकी कुल संपत्ति 1413.80 करोड़ रुपये है. डीके शिवकुमार पर 265.06 करोड़ से अधिक की देनदारी है. एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार सिद्धारमैया की टीम में अभी जो मंत्री हैं, उसमें चित्तरपुर से प्रियांक खरगे के पास सबसे कम संपत्ति है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक ने जो हलफनामा घोषित किया है, उसमें उन्होंने खुद को 16.83 करोड़ रुपये का मालिक बताया है.

कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री और उनकी संपत्ति

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया – कुल संपत्ति 51 करोड़ रुपये

उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार – कुल संपत्ति 1413.80 करोड़ रुपये

जी परमेश्वर – कुल संपत्ति 21 करोड़ रुपये

के एच मुनियप्पा -कुल संपत्ति 59 करोड़ रुपये

एम बी पाटिल – कुल संपत्ति 141 करोड़ रुपये

सतीश जारकिहोली – कुल संपत्ति 175 करोड़ रुपये

प्रियांक खरगे – कुल संपत्ति 16 करोड़ रुपये

रामलिंगा रेड्डी – कुल संपत्ति 110 करोड़ रुपये

बी जेड जमीर अहमद खान – कुल संपत्ति 72 करोड़ रुपये

कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री और उनकी शिक्षा

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया – स्नातक प्रोफेशनल

उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार – पोस्ट ग्रेजुएट

जी परमेश्वर – पीएचडी

के एच मुनियप्पा – स्नातक प्रोफेशनल

एम बी पाटिल – स्नातक प्रोफेशनल

सतीश जारकिहोली – 12वीं पास

प्रियांक खरगे – 10वीं पास

रामलिंगा रेड्डी – स्नातक

बी जेड जमीर अहमद खान – 8वीं पास

कर्नाटक में कांग्रेस ने 135 सीट लाकर कांग्रेस ने सरकार बनायी

गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के तहत 10 मई को मतदान संपन्न हुआ था और 13 मई को मतगणना की गई है. कांग्रेस ने 224 सीटों में से 135 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की और वहीं भारतीय जनता पार्टी को 66 सीटें और जनता दल (सेक्युलर) को मात्र 19 सीटों पर संतोष करना पड़ा.

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