भारत में महंगाई का घुटने लगा दम? जानें खुदरा मुद्रास्फीति पर क्या कहता है एनएसओ

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नई दिल्ली : भारत में महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) समेत देश-दुनिया के तमाम संस्थान भरोसा दिलाते हैं कि साल 2023 के दौरान भारत में महंगाई का दम घुटने लगेगा. बुधवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से एक रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि मार्च में खुदरा महंगाई दर 15 महीने के निचले स्तर पर खिसककर 5.66 फीसदी पर आ गई है. खुदरा मुद्रास्फीति में यह गिरावट इसलिए दर्ज की गई, क्योंकि खाने के सामानों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई.

आरबीआई के दायरे में महंगाई

एनएसओ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च में मुद्रास्फीति का आंकड़ा आरबीआई के संतोषजनक स्तर की ऊपरी सीमा 6 फीसदी के भीतर है. आरबीआई को मुद्रास्फीति 2 से 6 फीसदी के बीच रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी 2023 में 6.44 फीसदी और एक साल पहले मार्च में 6.95 फीसदी थी.

फरवरी में दूध-फल और अनाज महंगा

एनएसओ के अनुसार खाद्य उत्पादों की मुद्रास्फीति मार्च में 4.79 फीसदी रही. यह आंकड़ा फरवरी में 5.95 फीसदी और एक साल पहले इसी अवधि में 7.68 फीसदी था. रिपोर्ट में कहा गया है कि अनाज, दूध और फलों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2022 में 5.7 फीसदी से बढ़कर फरवरी 2023 में 6.4 फीसदी हो गई थी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2023-24 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के 5.2 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया है.

फरवरी में औद्योगिक उत्पादन बढ़ा

उधर, एनएसओ की एक अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का औद्योगिक उत्पादन साल 2023 के फरवरी महीने में 5.6 फीसदी बढ़ा है. एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर मापा जाने पर औद्योगिक उत्पादन फरवरी 2022 में 1.2 फीसदी बढ़ा था. एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन इस साल फरवरी में 5.3 फीसदी रहा और इसी महीने में खनन उत्पादन 4.6 फीसदी तथा बिजली उत्पादन में 8.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

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