हिंदू काॅलेज में कवि के साथ कार्यक्रम:डाॅ बसंत त्रिपाठी ने कहा- सोशल मीडिया नए कवियों के लिए अच्छा प्लेटफॉर्म

3

कवि बसंत त्रिपाठी ने आयोजन में अपनी अनेक चर्चित कविताओं का पाठ किया जिनमें ‘टूटा हुआ पंख’, ‘चलन से बाहर एक अठन्नी’, ‘इस बार बारिश,घर और पड़ोस’ प्रमुख थीं. त्रिपाठी ने अपनी कुछ प्रतिनिधि प्रेम कविताओं का भी पाठ किया जिनमें ‘घड़ी दो घड़ी’ व ‘मैं तुमसे प्यार करता हूं’ को श्रोताओं ने बहुत पसंद किया. कवि विवेक निराला ने कविता पाठ के अंतर्गत ‘नागरिकता’,’भाषा’,’तबला’,’असुविधा’,’कथा’,’अभिधा की एक शाम’ व ‘बाबा और तानपुरा’ को पर्याप्त सराहना मिली. निराला ने बताया कि आजकल वे छंदों में ‘उद्धव शतक’ का काव्य सृजन कर रहे हैं जिसकी प्रेरणा उन्हें महाकवि निराला जी से मिली है और इसके पीछे छंद के सामयिक महत्व व जरूरत भी शामिल है. हाल ही में राजस्थान में एक दलित बच्चे को मटके से पानी पी लेने पर मिली सजा के प्रसंग पर निराला ने ‘छुई न जाए कोई मटकी’ शीर्षक से एक अत्यंत मार्मिक कविता का पाठ किया. यह कविता सीधे तौर पर हमारे समाज में व्याप्त जाति,धर्म,छुआछूत जैसी भेदभाव ग्रस्त मानसिकता पर व्यंग्य है.

Source link

Get real time updates directly on you device, subscribe now.