HDFC बैंक ने हासिल किया नया मुकाम, TCS को पछाड़ बनीं दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी,पहले स्थान पर जानें किसका कब्जा

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देश की दूसरी सबसे बड़ी प्राइवेट बैंक HDFC ने एक नया मुकाम हासिल किया है. अब एचडीएफसी बैंक मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से भी दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है. बता दें कि इसी महीने एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी का मर्जर हुआ था. बैंक टीसीएस को तीसरे स्थान पर ढकेलते हुए दूसरे स्थान पर पहुंची है. शेयर बाजार में गुरुवार को बीएसई में कारोबार बंद होते समय एचडीएफसी बैंक का शेयर 1,688.50 रुपये के भाव पर रहा. इस तरह कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण 12,72,718.60 करोड़ रुपये हो गया जो टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से अधिक है. सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 12,66,891.65 करोड़ रुपये का रहा. यह एचडीएफसी बैंक की तुलना में 5,826.95 करोड़ रुपये कम है.

पहले स्थान पर रियालंस का कब्जा

एचडीएफसी बैंक में उसकी मूल कंपनी एचडीएफसी बैंक का विलय एक जुलाई से प्रभावी हो चुका है. करीब 40 अरब डॉलर के इस सौदे को भारतीय कंपनी जगत का सबसे बड़ा विलय माना गया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज 17,72,455.70 करोड़ रुपये के मूल्यांकन के साथ देश की सर्वाधिक मूल्यवान कंपनी बनी हुई है. उसके बाद एचडीएफसी बैंक और टीसीएस का स्थान है. एचडीएफसी बैंक अब देश पूंजीकरण के लिहाज से देश का सबसे मूल्यवान बैंक भी बन गया है. उसके बाद आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक का स्थान है. वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज की बादशाहत कायम है. रिलायंस 17,72,455.70 करोड़ रुपये के बाजार मूल्यांकन के साथ देश की सबसे मूल्यवान कंपनी है. जबकि, चौथे पर आईसीआईसीआई बैंक 6,96,538.85 करोड़ रुपये के बाजार मुल्यांकन और पांचवे पर हिंदुस्तान यूनिलीवर 6,34,941.79 करोड़ रुपये के बाजार मुल्य के साथ स्थिर है.

इन्फोसिस ने पहली तिमाही में कमाया 11 प्रतिशत शुद्ध लाभ

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी इन्फोसिस का चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 11 प्रतिशत बढ़कर 5,945 करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले की समान अवधि में 5,362 करोड़ रुपये था. हालांकि इन्फोसिस ने वृहद आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच चालू वित्त वर्ष 2023-24 के लिए अपने वृद्धि अनुमान को घटाकर एक से 3.5 प्रतिशत कर दिया है. पहले इसने राजस्व वृद्धि में चार से सात प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था. अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी की आमदनी 10 प्रतिशत बढ़कर 37,933 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 34,470 करोड़ रुपये थी. जनवरी-मार्च तिमाही की तुलना में बीती तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ तीन प्रतिशत घट गया जबकि राजस्व में तिमाही आधार पर 1.31 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है.

जनरेटिव एआई और बड़े सौदों का मिला कंपनी का लाभ

इन्फोसिस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सलिल पारेख ने बाजार में निर्णय-निर्माण में हो रही देरी का जिक्र करते हुए कहा कि पहली तिमाही में हमने कुछ बड़े सौदे किए लेकिन सौदों पर हस्ताक्षर और उन पर अमल होने में देरी देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा कि इस देरी की वजह से इन बड़े सौदों से मिलने वाला राजस्व वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से में ही आ पाएगा. पारेख ने तिमाही नतीजों के बारे में संवाददाताओं से कहा कि पहली तिमाही में कुछ खास क्षेत्रों में ग्राहकों ने बदलावकारी परियोजनाओं की संख्या घटाने के साथ निर्णय लेने में भी देर की. हालांकि, जनरेटिव एआई और बड़े सौदों के मामले में हमें अच्छी प्रगति देखने को मिली.

कंपनी ने इस वर्ष किया 2.3 अरब डॉलर का समझौता

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इन्फोसिस ने 2.3 अरब डॉलर के बड़े सौदे किए जिससे भावी वृद्धि के लिए मजबूत आधार तैयार करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा कंपनी को 80 परियोजनाएं कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में मिलीं. इन्फोसिस ने अपने शेयरधारकों को 17.50 रुपये का अंतिम लाभांश देने की भी घोषणा की. इस प्रस्ताव को 28 जून की साधारण आमसभा में मंजूरी दी गई थी. पिछले हफ्ते अन्य आईटी कंपनियों टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, विप्रो और एलटीआईमाइंडट्री ने भी पहली तिमाही के नतीजों की घोषणा की थी.

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