ईस्ट ऑफ कैलाश में तानसेन संगीत महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव “प्रोत्साहन” का भव्य आयोजन

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वरिष्ठ संवाददाता/महेश ढौंढियाल 

नयी दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के आर्य सभागार, ईस्ट ऑफ कैलाश  में तानसेन संगीत महाविद्यालय ने अपना वार्षिकोत्सव “प्रोत्साहन” का भव्य आयोजन सुबह दस बजे से रात दस बजे तक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ बड़ी धूमधाम से किया।
इसमें संस्था के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने कई मनमोहक कार्यक्रम पेश किये। इसमें छोटे-छोटे बच्चे-बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तथा पुरुषों ने भी भाग लिया। यह समारोह वाद्य यत्रों, गायकी, और नृत्य के तीन भागों में हुआ। वाद्य यत्रों में श्रोताओं ने तबला, बाँसुरी, पियानो, गिटार, वायलिन, ड्रम्स, और सैक्सोफोन का भरपूर आनंद लिया, तो गायकी में लोकप्रिय गानों और शास्त्रीय संगीत ने उनका मन मोह लिया। नृत्य में, कथक, भरतनाट्यम, बोलीवुड, वैस्टर्न, और लोकनृत्य की बहार रही। कार्यक्रम के साथ-साथ चित्रकला की एक प्रदर्शनी और कार्यशाला भी लगी थी।

इस समारोह को सुनने-देखने के लिए न केवल विद्यार्थियों के माता-पिता और रिश्तेदार ही आये थे, बल्कि कई गणमान्य श्रोता-दर्शक भी इसकी शोभा बड़ा रहे थे। सभागार सारे दिन पूरी तरह से भरा हुआ था और तालियों की आवाज से गूँज रहा था।
तानसेन संगीत महाविद्यालय का नाम भारत में संगीत के सबसे अच्छे और बड़े ब्रांड नामों में जाना-माना जाता है। यह भारत में संगीत क्षेत्र में काफी पुराना नाम है। यहां संगीत और नाच दोनों सिखाये जाते हैं तथा रियलिटी शो तथा टेलेन्ट हंट शो के लिए भी विद्यार्थियों को तैयार कराया जाता है। विद्यालय में प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद (प्रयागराज) तथा ट्रिनिटी कालेज, लंदन आदि की परीक्षायें भी दिलवाई जाती हैं।

तानसेन संगीत महविद्यालय, कालकाजी ने कोरोना-कोविद के समय भी, विद्यालय बंद होते हुए भी अपने विद्यार्थियों, उनके माता-पिता और अपने अद्यापकों से संबंध नहीं तोड़ा। यही कारण है कि इनमें से ज्यादतर इससे आज भी जुड़े हैं। इसके कई विद्यार्थी तो काफी दूर-दूर से आते हैं। कितने ही परिवारों से एक से ज्यादा सदस्य इसमें शिक्षा लेते हैं। इसमें कुछ ‘स्पेशल बच्चे’ (डिफरेंटली एबल्ड) भी हैं जिनके लिए कला, संगीत, और नृत्य काफी लाभकारी हैं। तानसेन संगीत महाविद्यालय की एक विशेषता यह है कि इसमें धनार्जन से ज्यादा संगीत सेवा और विद्यार्थियों की संख्या से ज्यादा शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता है। इसमें ऊंची दुकान, फीका पकवान जैसी व्यवसायिक मानसिकता नहीं है। बल्कि इसका आदर्श वाक्य सादा परिवेश, उच्च शिक्षा है। इसकी मालकिन श्रीमति राधा गुसाईं योग अध्यापक हैं और संचालक श्री पी. एस. गुसाईं, भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।

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