बॉक्स ऑफिस पर फिर मचने लगा ‘गदर’, तीन दिनों में देशभर में दो करोड़ दर्शक पहुंचे सिनेमाघर

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देशभर में 11, 12 और 13 अगस्त को पांच फिल्मों ने ~400 करोड़ की कमाई की. बॉक्स ऑफिस की रौनक एक बार फिर लौट आयी है. लॉकडाउन के समय ओटीटी पर दर्शक जरूर बढ़े, लेकिन सिनेमाघर के नये रूप और फिल्मों की कहानी दर्शकों को वापस खींच रही है. यही कारण है कि सिनेमाघर में काफी भीड़ जुट रही है. गदर-2, ओएमजी-2 जैसी फिल्में देखने के लिए दर्शक सिनेमाघर पहुंच रहे हैं. सिनेमाघर के संचालक से लेकर फिल्म जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि अच्छी फिल्में ही दर्शकों को सिनेमाघरों की ओर खींच सकती हैं.

दर्शकों को खींच रही फिल्मों की कहानी

सुजाता सिनेमा के मैनेजर राजू कुमार कहते हैं, फिल्मों की कहानी पर सिनेमाघर का टिकट निर्भर करता है. कई फिल्में ऐसी होती हैं, जिसमें दर्शकों का रुझान काफी कम रहता है. लेकिन गदर-2 जैसी फिल्में आ जाये, तो हाउसफुल शो चलता है. फन सिनेमा के अस्सिटेंट मैनेजर अमित मिंज कहते हैं : काफी दिनों के बाद सिनेमाघरों में इतनी भीड़ देखने को मिली है. नहीं, तो कई फिल्में के शो वीकेंड के दूसरे दिन ही खाली हो जाते हैं. यदि सिनेमा के कंटेंट अच्छे होंगे, तो लोग सिनेमाघर की ओर ही बढ़ेंगे. हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि दर्शकों की पसंद क्या है.

लॉकडाउन में बढ़ा था ओटीटी का क्रेज

कोरोना काल में लोग घरों में कैद थे. कोरोना के बढ़ते कहर और डर को दूर करने के लिए लोग मोबाइल और टीवी से अधिक जुड़ने लगे. इस दौरान ओटीटी पर सिनेमा और वेब सीरीज की तरफ दर्शकों का रुझान बढ़ा. झारखंड के फिल्म निर्माता और निर्देशकों का मानना है कि दर्शकों को मनोरंजन चाहिए जो उन्हें ओटीटी पर मिलने लगा. लॉकडाउन हटने के बाद जब सिनेमाघर खुले, तो भी दर्शकों का रुझान नहीं दिखा. हालांकि जनजीवन सामान्य होने पर फिर सिनेमाघर की ओर कदम बढ़ने लगे.

रांची में हैं आधुनिक सिनेमाघर

रांची में नौ सिनेमाघर हैं, जिसमें आइलेक्स, फन सिनेमा, मिराज सिनेमा, पॉपकार्न सिनेमा, सुजाता, पीवीआर, प्लाजा, जेडी सिनेमा शामिल है. वहीं पीजेपी सिनेमा की शुरुआत 13 अगस्त को ही हुई है. मॉल ऑफ रांची में खुला पीजेपी नयी तकनीक के साथ लैस है. इसका साउंड सिस्टम बेहतरीन है

ऐसे बदल रहे सिनेमाघरों के रूप

रांची में आठ सिनेमाघर हैं, जो आधुनिक सुविधाओं से युक्त हैं. इन सिनेमाघरों में 70 प्रतिशत से अधिक टिकट की बुकिंग ऑनलाइन ही होती है. कुछ सिनेमाघरों में तीन, तो कुछ में छह कैटेगरी में दर्शकों के बैठने की सुविधा है. इसमें सिल्वर, गोल्ड, प्रीमियम, ग्रीको, क्लब, रिक्लाइन जैसे कैटेगरी हैं. रिक्लाइन कैटेगरी की सीटें सोफा कम बेड के आकार की होती हैं, जिसमें दर्शक के हाथ में रिमोट होता है. बैठकर या लेटकर सिनेमा देख सकते हैं.

सिनेमाघरों में नयी तकनीक के साथ सिनेमा देखने का आनंद अलग

रविकांत उपाध्याय ने कहा, कोरोना काल में घर के अंदर ही मनोरंजन की सभी सुविधाएं मिलने लगी थीं. इस कारण दर्शकों का रुझान सिनेमाघरों के प्रति काफी कम हो गया था. इसका एक कारण था कि बॉलीवुड फिल्मों में अच्छे कंटेंट की कमी. इस कारण दर्शक सिनेमाघरों की ओर रुख नहीं कर रहे थे. हाल में रिलीज होनेवाली बॉलीवुड फिल्मों की कहानी अच्छी हैं, इसलिए सिनेमाघरों का क्रेज फिर बढ़ने लगा है. अब तो सिनेमाघरों में नयी तकनीक के साथ सिनेमा देखने का आनंद ही अलग है.

दर्शकों का रुझान सिनेमाघर की ओर बढ़ रहा

गुलशन बर्णवाल ने कहा, जो आनंद सिनेमाघरों में है, वैसा कहीं नहीं मिलता. सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ के बीच मल्टीप्लेक्स की सुविधा जैसे बड़ी स्क्रीन, सिनेमैटिक शॉट काफी पसंद आता है. यदि गदर-2 जैसी अच्छी फिल्में बनने लगे, तो दर्शक ओटीटी को भूल जायेंगे. दर्शक फिर से सिनेमाघर की ओर जाने लगेंगे. मॉल ऑफ रांची के डायरेक्टर नीतिश अग्रवाल ने कहा, कोरोना के कारण ओटीटी का क्रेज बढ़ा था, लेकिन अब बॉलीवुड की अच्छी फिल्में आने लगी हैं. फिर से दर्शकों का रुझान सिनेमाघर की ओर बढ़ रहा है. मॉल ऑफ रांची में प्रकाश झा के सिनेमा स्क्रीन्स पीजेपी सिनेमा को दर्शकों का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है.

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