लड़ाकू विमान तेजस के इंजन का भारत में ही होगा उत्पादन, जीई एरोस्पेस ने HAL से किया करार

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नई दिल्ली : भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के इंजन का उत्पादन अब भारत में ही होगा. इसके लिए अमेरिकी कंपनी जीई एरोस्पेस ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ समझौता किया है. मीडिया की रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि भारत में लड़ाकू विमानों के इंजन के संयुक्त उत्पादन के लिए गुरुवार को जीई एरोस्पेस ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए. रिपोर्ट में कहा गया है कि जीई एरोस्पेस ने गुरुवार को हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ भारतीय वायु सेना के हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए)-एमके-2 तेजस के जेट इंजन के संयुक्त उत्पादन के लिए समझौता किया. इस समझौते को मील का पत्थर माना जा रहा है.

अमेरिका की यात्रा पर गए हैं पीएम मोदी

मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि जीई एरोस्पेस और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच हुए समझौते की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान की गई है. प्रधानमंत्री मोदी अभी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बाइडन के निमंत्रण पर अमेरिका की यात्रा पर गए हैं.

भारत में होगा एफ414 इंजन का संयुक्त उत्पादन

अमेरिकी कंपनी जीई एरोस्पेस ने अपने बयान में कहा कि इस समझौते में जीई एरोस्पेस के एफ414 इंजन के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना शामिल है. जीई एरोस्पेस अमेरिकी सरकार के साथ इस उद्देश्य के लिए जरूरी निर्यात प्राधिकार प्राप्त करने के लिए काम करना जारी रखेगा. उसने एचएएल के साथ समझौता ज्ञान को भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में एक एक महत्वपूर्ण तत्व बताया है. जीई एरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा जीई के अध्यक्ष एच लॉरेंस कल्प जूनियर ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता भारत और एचएएल के साथ हमारे दीर्घकालिक गठजोड़ के कारण संभव हुआ है.

तेजस ने दुनिया में मनवाया है अपना लोहा

बताते चलें कि भारत में निर्मित लड़ाकू विमान तेजस की दुनिया भर में काफी मांग है. मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस का अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, कोलंबिया, फिलीपींस और मलेशिया जैसे देशों में निर्यात किया जाता है. बताया जाता है कि भारतीय विमान तेजस ने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा लिया है. उसने यह दिखा दिया है कि वह कई मामले में चीन, रूस और दक्षिण कोरिया के विकसित विमानों से श्रेष्‍ठ है. अपने कई बेजोड़ खूबियों के कारण वह अन्‍य देशों के विमानों पर भारी पड़ा है.

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