Farrey Movie Review: एजुकेशन सिस्टम का जामताड़ा है फर्रे… अलीज़ेह अग्निहोत्री अभिनय में रहीं अव्वल

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फ़िल्म – फर्रे

निर्माता – सलमान खान फिल्म्स, अतुल अग्निहोत्री और अन्य

निर्देशक – सौमेंद्र पाधी

कलाकार -अलीज़ेह अग्निहोत्री, प्रसंना बिष्ट, जेन, साहिल, जूही बब्बर, रोनित रॉय, शिल्पा शुक्ला और अन्य

प्लेटफार्म – सिनेमाघर

रेटिंग – तीन

सलमान खान अपनी फिल्मों से युवा कलाकारों को लॉन्च करते रहे हैं, इस बार फर्रे फिल्म से उन्होने अपनी भांजी अलीज़ेह अग्निहोत्री को लॉन्च किया है. अलीज़ेह स्टार किड हैं, लेकिन उन्होंने अपनी लॉन्चिंग के लिए कमर्शियल अंदाज में रियलिस्टिक सिनेमा को चुना हैं, जो एक क्राइम ड्रामा है, जिसमें इमोशन है लेकिन रोमांस, एक्शन, ग्लैमर और नाच गानों का फार्मूला नहीं है, जो इस फिल्म को खास बना गया है. फिल्म के निर्देशक जामताड़ा फेम निर्देशक सौमेंद्र पाधी है. जामताडा की तरह यहां भी कहानी चीटिंग की ही है और युवा कलाकारों की टोली भी है. फिल्म में अलीज़ेह कहानी की धुरी हैं, लेकिन उनके साथ दूसरे प्रतिभाशाली युवा कलाकार भी कहानी के सभी छोर को मजबूती से अपने अभिनय से मजबूती से संभाले हुए है. जैसा जामताडा में था. फिल्म अपने विषय, इसके ट्रीटमेंट और युवा कलाकारों के अभिनय और कहानी में छिपे सन्देश की वजह से ज़रूर देखी जानी चाहिए.

एजुकेशन सिस्टम पर है कहानी

यह फिल्म थाईलैंड की फिल्म बैड जीनियस का हिंदी रीमेक है. फिल्म की कहानी नियति (अलीज़ेह) की है वह अनाथ आश्रम में पली बढ़ी है. अनाथ आश्रम के वार्डन (रोनित रॉय) एक पिता की तरह उसका और अनाथ आश्रम में रहने वाली सभी बच्चियों का ख्याल रखते हैं, लेकिन कमज़ोर आर्थिक स्थिति कई बार उनके आड़े आ जाती है. बचपन से आर्थिक तंगी को झेल रही नियति पढ़ाई में जीनियस है, जिस वजह से शहर के सबसे बड़े कॉलेज में उसे स्कालरशिप मिल जाती है. वहां अरबपतियों के बच्चे पढ़ते हैं. एक दिन वह अपनी एक अमीर दोस्त को एग्जाम में चीटिंग करवा देती है, जिसके बदले में उसे पैसे और महंगे तोहफ़े मिलते है. नियति को यह आर्थिक तंगी से निकलने का आसान तरीका लगता है. वह अपने अमीर दोस्तों को स्कूल के एग्जाम में चीटिंग करवाती है. धीरे-धीरे उसकी लालच इतनी बढ़ जाती है कि वह एक इंटरनेशनल एग्जाम में अपने अमीर दोस्तों को चीटिंग करवाने के लिए ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच जाती है. क्या यह चीटिंग उसके लिए आसान रहेगी या वह अपना सबक सीखेगी. यही फिल्म की आगे की कहानी है.

फिल्म की खूबियां और खामियां

जामताड़ा फेम निर्देशक सौमेंद्र पाधी की इस फिल्म का ट्रीटमेंट रियलिस्टिक रखा है. फिल्म से जुड़ा हर किरदार ग्रे है. जिससे फिल्म की कहानी में लेयर बनते हैं. टीनएज वाली इस कहानी में लव स्टोरी को जबरदस्ती ठूंसा नहीं गया है, जैसा आमतौर पर टीन एज कहानियों में होता है बल्कि यह फिल्म अमीर गरीब के बीच के फर्क, फैमिली द्वारा बेस्ट करने का प्रेशर, बच्चों के बीच तुलना, शॉर्टकट तरीके से सफलता पाने जैसे अहम मुद्दे को सामने लेकर आती है.फिल्म की एडिटिंग चुस्त है. कहानी में ट्विस्ट एंड टर्न फिल्म की रोचकता को और बढ़ाते हैं. हां फिल्म का क्लाइमैक्स उस कदर प्रभावी नहीं बन पायी है. जैसी फिल्म ने शुरुआत से उम्मीद बनायीं थी. फिल्म का नाम फर्रे है लेकिन यहां पर्ची में चीटिंग नहीं होती है बल्कि बहुत ही हाइटेक अंदाज में चीटिंग को अंजाम दिया गया है. फिल्म में चीटिंग के मामले में थोड़ी सिनेमेटिक लिबर्टी भी ली गयी है. फिल्म की सिनेमाटोग्राफी फिल्म में एक अलग ही रंग भरती है. फिल्म का गीत संगीत औसत रह गया है. संवाद कहानी के अनुरूप है.

अलीजेह और प्रसन्ना की दमदार है एक्टिंग

अलीज़ेह अग्निहोत्री ने इस फिल्म से पहली बार कैमरे का सामना किया है और उन्होने बहुत ही आत्मविश्वास के साथ अपने किरदार को पूरी बारिकी के साथ जिया है. फिल्म में उनके और रोनित रॉय के बीच एक इमोशनल सीन हैं, जिसे वह उम्दा तरीके से निभा गयी है. यह सीन उनके अभिनय क्षमता को बखूबी सामने लेकर आया है. अलीज़ेह के बाद अभिनेत्री प्रसन्ना की तारीफ करनी होगी. अपने किरदार की चालाकी, मौकापरस्ती को वह अपने एक्सप्रेशन के जरिये बखूबी सामने लें आयी हैं. युवा कलाकार साहिल एक बार फिर प्रभावित करते हैं. जेन, जूही बब्बर और रोनित रॉय अपनी -अपनी भूमिकाओं में न्याय करते हैं. शिल्पा शुक्ला को फिल्म में करने के लिए कुछ खास नहीं था.

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