Farmers Protest में एक और प्रदर्शनकारी की मौत हुई है.

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Farmers Protest में शामिल एक प्रदर्शनकारी के मौत की खबर आ रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खनौरी बॉर्डर पर हार्ट अटैक से एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई है. इस बीच खबर है कि हरियाणा पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ रासुका लगाने का फैसला वापस ले लिया है. मामले की जानकारी देते हुए ASP पूजा डाबला ने मीडिया को जानकारी दी कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्णय लिया गया है कि अभी हम इसका कोई भी प्रावधान लागू नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि NSA के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. मैं किसानों से अपील करती हूं कि वे लॉ एंड ऑर्डर हाथ में लेने से बचें. कानून-व्यवस्था बनाए रखने में हमारी मदद करें और शांति बनाए रखें.

आपको बता दें कि इससे एक दिन पहले अंबाला पुलिस की ओर से एक बयान जारी किया गया था. इसमें कहा गया था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 2(3) के तहत प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के पदाधिकारियों पर कार्रवाई करेगी. पदाधिकारियों को हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात पुलिस की ओर से की गई थी.

प्रदर्शनकारी शुभकरण सिंह की हुई थी मौत

इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खनौरी सीमा पर मारे गए प्रदर्शनकारी शुभकरण सिंह के परिवार को मुआवजा देने का ऐलान किया है. उन्होंने मृतक के परिवार को मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपये और उसकी बहन को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की. उल्लेखनीय है कि पंजाब-हरियाणा सीमा पर खनौरी में बुधवार को झड़प में बठिंडा के प्रदर्शनकारी शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी जो 21 वर्ष का था. इस झड़प में 12 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे.

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क्या है किसानों की मांग

किसान नेताओं ने शुभकरण सिंह की मौत हो जाने के बाद बुधवार को दिल्ली मार्च दो दिन के लिए रोक दिया था. किसानों की ओर से कहा गया था कि वे शुक्रवार शाम को अपना अगला कार्यक्रम तय करेंगे. पंजाब के किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के साथ-साथ किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने, पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लेने, 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘न्याय’ देने की मांग कर रहे हैं. यहीं नहीं किसान भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 के आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग कर रहे हैं.

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