पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नयी तकनीक के प्रयोग पर दिया गया जोर, बोले मंडाविया

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गांधीनगर से अंजनी कुमार सिंह

पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का उपयोग वैश्विक स्तर पर बढ़ाने और आम लोगों तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की पहुंच सुनिश्चित करने को लेकर 75 देशों के प्रतिनिधियों ने गांधीनगर में दो दिनों तक मंथन किया. पहले वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में दुनिया के अन्य देशों की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में हो रहे शोध और चुनौतियों पर विशेषज्ञों, स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने चर्चा की. दो दिवसीय सम्मेलन की जानकारी देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि इस दौरान विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा से निकले परिणाम से ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल सेंटर के कामकाज की दिशा तय करने में मदद मिलेगी और साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के पारंपरिक चिकित्सा के लिए तैयार हो रहे वर्ष 2025-34 रणनीतिक दस्तावेज में भी इसका उपयोग किया जायेगा.

शिखर सम्मेलन में गुजरात घोषणा पत्र के दस्तावेज पर विस्तृत चर्चा की गयी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अतिरिक्त महानिदेशक डॉक्टर ब्रूस और आयुष सचिव ने कहा कि मसौदे को जल्द जारी किया जायेगा. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में पारंपरिक चिकित्सा के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से किये जा रहे तीसरे वैश्विक सर्वे के शुरुआती नतीजे की जानकारी भी दी गयी और सर्वे के अंतिम परिणाम नवंबर में जारी होगा.

mansukh mandaviya
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया

सर्वे के शुरुआती परिणाम से पता चलता है कि सर्वे में भाग लेने वाले 157 सदस्य देशों में से 97 देशों ने पारंपरिक चिकित्सा को लेकर राष्ट्रीय नीति का निर्माण कर लिया है. दो दिन के इस शिखर सम्मेलन में पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया. साथ ही दुनिया को स्वस्थ बनाने के लिए पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ जोड़ने पर विशेष बल दिया गया. सम्मेलन में डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देने पर चर्चा की गयी और अतिथियों को मोटे अनाज से बना खाना परोसा गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर दुनिया अंतर्राष्ट्रीय श्री अन्न वर्ष मना रही है.

जी-20 स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में भावी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की बनी रणनीति

जी-20 स्वास्थ्य मंत्रियों के सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर मौजूदा स्वास्थ्य जरूरतों और चुनौतियों पर चर्चा की गयी. बैठक में तय किया गया कि कोरोना महामारी से सबक लेते हुए दुनिया को सतत और समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था अपनाने की जरूरत है ताकि भावी स्वास्थ्य चुनौतियों को सामना किया जा सके. दुनिया के विकासशील देशों में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की पहुंच सुनिश्चित करने, सस्ती दवा और वैक्सीन की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया गया. स्वास्थ्य सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देने और नये खोज करने पर जोर दिया गया ताकि सभी को स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे में लाया जा सके. पर्यावरणीय बदलाव के कारण स्वास्थ्य चुनौतियां काफी बढ़ गयी है और आने वाले समय में संक्रामक रोगों की संख्या बढ़ने की संभावना है.

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया

साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी लोगों के समक्ष स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां सामने आयेंगी. ऐसे में बैठक में पर्यावरणीय बदलाव से निपटने में सक्षम स्वास्थ्य सेवा विकसित करने, पर्यावरण के अनुकूल इलाज के तरीके अपनाने पर सहमति बनी. स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में तथ्य परक पारंपरिक चिकित्सा पद्धति अपनाने पर जोर दिया गया.

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