Emergency Special : 58 की ‘इंदिरा’ के सामने 73 के ‘जेपी’, ‘मां’ के साथ खड़ा था 29 साल का ‘लाडला’

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48 Years of Emergency : आज 25 जून 2023 है. यह तवारीख भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास का ‘काला अध्याय’ माना जाता है. 25 जून 1975 को ही कांग्रेस (आई) की जन्मदात्री भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के तथाकथित इशारे पर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने पूरे देश में आपातकाल लागू करने का ऐलान किया था. 25 जून 1975 से घोषित आपातकाल करीब 21 महीने के अंतराल के बाद 21 मार्च 1977 के बाद समाप्त हुआ था. सबसे बड़ी बात यह है कि इस आपातकाल से पहले इंदिरा गांधी के शासन के खिलाफ समाजवादी विचारक और देश के प्रमुख नेता जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में 18 मार्च 1974 को बिहार की राजधानी पटना से छात्र आंदोलन की शुरुआत की गई, जो बाद में ‘संपूर्ण क्रांति’ के नाम से एक आंदोलन बन गया, जिसे आज ‘जेपी आंदोलन’ के नाम से जाना जाता है.

मां के साथ क्यों खड़े हुए संजय गांधी

सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में जब 25 जून 1975 को आपातकाल लगा, उससे करीब सवा साल पहले 18 मार्च 1974 को बिहार में जेपी आंदोलन की नींव रखी गई, जो आपातकाल में विकराल हो गया. जेपी का आंदोलन और आपातकाल के दौरान की एक जो सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, वह है संजय गांधी की. बिहार में इंदिरा गांधी के शासनकाल के दौरान बढ़ती महंगाई को लेकर छात्रों ने आक्रोश जाहिर किया, जिसे समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने लपक लिया (क्यों लपका यह भी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के समय के इतिहास की गंभीर चर्चा का विषय है.), जिसे बाद में एक बड़ा आंदोलन का स्वरूप दिया गया. इसके बाद आपातकाल लग गया. सारा देश इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़ा था, मगर अपनी मां के साथ खड़े थे, तो वे संजय गांधी थे. इस आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी मात्र 29 साल के थे. बड़े भाई राजीव गांधी के विदेश में पढ़ाई करने और फिर पायलट बन जाने के बाद संजय गांधी ही अक्सर मां इंदिरा के साथ रहते थे और राजनीतिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते थे. वे चाहते, तो बिहार के छात्रों की ओर से शुरू होकर पूरे देश में फैलने वाले छात्र आंदोलन का हिस्सा बन सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने नाना के परम मित्र जयप्रकाश नारायण के आंदोलन या बिहार के छात्र आंदोलन के साथ खड़े होने के बजाय अपनी ‘मां’ इंदिरा गांधी के साथ खड़ा ज्यादा मुनासिब समझा.

1975 में 29 साल के थे संजय गांधी

बताते चलें कि भारत में जब 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई थी, तब भारत के समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण भारतीय राजनीति के परिपक्व मानुष थे और उनकी उम्र करीब 73 साल की हो चुकी थी. जयप्रकाश नारायण का जन्म वर्ष 1902 में हुआ था. उसी समय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उम्र करीब 58 साल की थी. उनका जन्म वर्ष 1917 में हुआ था और इंदिरा गांधी के दूसरे बेटे संजय गांधी आपातकाल के दौरान केवल 29 साल के नौजवान थे, जिनका जन्म वर्ष 1946 को हुआ था.

संजय गांधी ने कांग्रेस-आई को दिया एक नया मुकाम

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो भारत में आपातकाल के दौरान जब राजनीति के दो धुरंधर नेता एक-दूसरे का आमना-सामना कर रहे हों, तो भला 29 साल का नौजवान क्या कर सकता है और क्या नहीं कर सकता है? और तब जबकि जंग में दोनों ही पारिवारिक और राजनीतिक तौर पर परमस्नेही हों? ऐसी स्थिति में 29 साल के नौजवान संजय गांधी ने ‘मां’ इंदिरा के साथ रहने का निर्णय किया और यह वही समय था, जब संजय गांधी ने मां की राजनीतिक पाठशाला से सबक लेकर परोक्ष तौर पर कांग्रेस-आई को एक नए मुकाम तक पहुंचाने का काम किया. यह बात दीगर है कि जब कभी भी आपातकाल के बाद कांग्रेस के पुनरुत्थान की बात आती है, तो संजय गांधी गौण हो जाते हैं. यह बाद का विषय है कि इंदिरा गांधी को चेहरा बनाकर पर्दे के पीछे से संजय गांधी ने देश में युवाओं का ब्रिगेड बनाकर किस प्रकार से कांग्रेस-आई को मजबूती प्रदान की. उनके युवा ब्रिगेड में ही 1984 दंगे के प्रमुख आरोपी सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर सरीखे लोग शामिल थे.

भारत में कब लगा आपातकाल

आज से ठीक 48 साल पहले 25 जून 1975 को भारत में आपातकाल लागू करने की घोषणा की गई थी. यह आपातकाल पूरे देश में 21 महीने के लिए लगाया था. उस समय कांग्रेस-आई की नेता इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं. मीडिया की रिपोर्ट्स और इतिहासकारों द्वारा बताया जाता है कि तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिरा गांधी के कहने पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू करने का ऐलान किया था. आजादी के बाद देश में लागू होने वाले आपातकालों में 25 जून 1975 वाले या इंदिरा गांधी वाले आपातकाल को विवादास्पद और अलोकतांत्रिक करार दिया गया. इसे लागू करने की घोषणा के बाद राजनीतिक तौर पर इंदिरा गांधी के घोर विरोधी और आपातकाल की मुखालफत करने वाले जयप्रकाश नारायण या जेपी ने इसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय कहा था.

आपातकाल लगाने के कारण

इतिहासकारों और मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत में वर्ष 1967 से 1971 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संसद में बहुमत के बूते सत्ता और राजनीति का ध्रुवीकरण कर दिया था. बताया जाता है कि प्रधानमंत्री सचिवालय से ही सत्ता संचालित की जाती थी और उसी सचिवालय के अंदर सरकार की सारी शक्तियों को केंद्रित कर दिया गया था. कहा यह भी जाता है कि उस समय इंदिरा गांधी के प्रमुख सिपहसालार और प्रधान सचिव परमेश्वर नारायण हक्सर या पीएन हक्सर के हाथों में सत्ता की चाबी थी, क्योंकि इंदिरा गांधी पीएन हक्सर पर सबसे अधिक भरोसा करती थीं. इसके साथ ही, इंदिरा गांधी भारत की राजनीति और सत्ता पर वर्चस्व बनाए रखने के लिए कांग्रेस को ही दो भागों में विभाजित कर दिया. वर्ष 1971 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी को गरीबी हटाओ के नारे पर प्रत्याशित जीत मिली. इसके चार साल के बाद वर्ष 1975 में 1971 के आम चुनाव में धांधली के आरोप में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद भारतीय राजनीति में गरमाहट पैदा हो गई. हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी पर छह साल तक कोई भी पद संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इसके बाद 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगा दिया गया.

आपातकाल के तात्कालिक कारण

वर्ष 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी ने अपने प्रतिद्वंद्वी राजनारायण को शिकस्त दी थी. चुनाव के नतीजे घोषित होने के चार साल बाद राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. अपनी याचिका में उन्होंने दलील दी कि चुनाव में इंदिरा गांधी ने सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया है, निर्धारित सीमा से अधिक पैसे खर्च किए और मतदाताओं को लुभाने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया. अदालत ने राजनारायण के इन आरोपों को सही करार दिया और इंदिरा गांधी के खिलाफ अपना फैसला सुनाया, जिसमें उन्हें छह साल तक के लिए किसी पद को संभालने पर रोक लगा दी गई.

आपातकाल में जेपी की भूमिका

आपातकाल की बात की जा रही हो और उसमें जयप्रकाश नारायण या जेपी के नाम की चर्चा न हो, तो बेमानी हो जाती है. इंदिरा गांधी या यूं कहें कि पूरे गांधी परिवार और कांग्रेस के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों में जयप्रकाश नारायण प्रमुख चेहरा थे. उन्हें जेपी आंदोलन का जनक भी कहा जाता है. आज भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में लालू प्रसाद यादव, जॉर्ज फर्नांडीज, अरुण जेटली, रामविलास पासवान, शरद यादव, डॉ सुब्रमण्यम स्वामी जैसे कई नेताओं और छात्र नेताओं का उदय हुआ. इंदिरा गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, राजनारायण, लालकृष्ण आडवाणी, चौधरी चरण सिंह, मोरारजी देसाई, नानाजी देशमुख, एचडी देवगौड़ा, वीएम तारकुंडे, लालू प्रसाद यादव, जॉर्ज फर्नांडीज, अरुण जेटली, रामविलास पासवान, शरद यादव, डॉ सुब्रमण्यम स्वामी आदि को जेल में डाल दिया.

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