DOMS IPO: 13 दिसंबर को खुलेगा डॉम्स इंडस्ट्रीज का आईपीओ, ग्रे मार्केट जबरदस्त हलचल, 80% उछला प्रीमियम

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DOMS IPO: बाजार में पेंसिल बनाने वाली कंपनी डॉम्स इंडस्ट्रीज के आईपीओ को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. निवेशक आईपीओ को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहा हैं. अब कंपनी के 1,200 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए मूल्य दायरा 750-790 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. दूसरी सबसे बड़ी पेंसिल विनिर्माता कंपनी का आईपीओ 13 दिसंबर को खुलकर 15 दिसंबर को बंद होगा. वलसाड के तटीय कस्बे उंबरगाव की कंपनी ने कहा कि निर्गम में 850 करोड़ रुपये की बिक्री पेशकश (ओएफएस) के साथ तो 350 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे. कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) राहुल शाह ने यहां संवाददाताओं से कहा कि शेयर का न्यूनतम मूल्य इक्विटी शेयर के अंकित मूल्य का 75 गुना और अधिकतम मूल्य 79 गुना है. गुजरात का उंबरगाव देश का पेंसिल नगर कहलाता है. यहां पेंसिल की दो सबसे बड़ी कंपनयां- डोम्स और हिंदुस्तान पेंसिल्स स्थित हैं. जहां डोम्स देश के पेंसिल बाजार की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है वहीं हिंदुस्तान पेंसिल्स 40 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखती है.

ग्रे मार्केट में 80 प्रतिशत तक मिल रहा प्रीमियम

डॉम्स के आईपीओ के सफलता को लेकर काफी कयास लगाये जा रहे हैं. ग्रे मार्केट में 4 दिसंबर को जहां इसकी कीमत 200 रुपये चल रही थी, वहीं अब 6 दिसंबर को इसका रेट 360 रुपये हो चुका है. जबकि, आठ दिसंबर तक कंपनी के आईपीओ पर प्रीमियम 80 प्रतिशत तक बढ गया है. ग्रे मार्केट की हलचल को देखते हुए माना जा रहा है कि कंपनी के आईपीओ से निवेशकों की बंपर कमाई हो सकती है.

आईपीओ क्या होता है

आईपीओ का पूरा नाम Initial Public Offering है. यह एक वित्तीय प्रक्रिया है जिसमें किसी प्राइवेट कंपनी ने अपने स्टॉक के खुले बाजार में निवेशकों के लिए प्रस्तावना जारी करने का निर्णय लिया होता है. यह उस कंपनी के लिए पहली बार होता है जब वह खुले बाजार में अपने शेयरों को बेचने के लिए जाती है. जब एक कंपनी आईपीओ जारी करती है, तो वह अपने शेयरों का प्रचार प्रसार करती है और इंवेस्टर्स को अपने शेयरों को खरीदने का मौका देती है. आईपीओ के माध्यम से कंपनी उसके स्टॉक को सार्वजनिक और न्यूजीज माध्यमों के माध्यम से निवेशकों के लिए उपलब्ध कराती है ताकि वे उसे खरीद सकें. आईपीओ के माध्यम से कंपनी अधिकतर अपने स्टॉक के लिए नए निवेशकों को खींचने की कोशिश करती है और इसके माध्यम से कंपनी अधिकतर पूंजी एकत्र करके अपने विकास और वित्तीय योजनाओं को पूरा करती है. यह निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प होता है क्योंकि यह उन्हें एक सार्वजनिक कंपनी के मालिक बनाने का अवसर प्रदान करता है.

सेकेंड हैंड आईपीओ का बाजार है ग्रे मार्केट

ग्रे मार्केट को आसान शब्दों में IPO का सेकेंड हैंड बाजार कहा जा सकता है. इसका अर्थ है कि आईपीओ जारी होने के बाद आप सीधे शेयर बाजार से खरीदारी करने के बजाये किसी निवेशक जिसने पहले से कंपनी में निवेश कर रखा है उससे आईपीओ की खरीदारी करते हैं. इस ग्रे मार्केट में सबसे बड़ी परेशानी ये आती है कि इसमें काम करने वाले सेलर, ब्रोकर और ट्रेडर कहीं भी रजिस्टर्ड नहीं होते हैं. इस बाजार में कोई नियम कानून नहीं है. केवल भरोसे और व्यक्तिगत बातचीत पर कारोबार होता है. वहीं, पैसे फंसने पर रिकवरी भी आपको खुद अपने माध्यम से ही करनी पड़ती है.

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