लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की वापसी के लिए स्पेशल ट्रेनों की मांग.

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नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों, पर्यटकों और छात्रों आदि की आवाजाही की अनुमति दे दी है। केंद्र की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपने यहां फंसे लोगों को उनके गृह राज्यों में भेजने की तैयारी करें। राज्यों ने मजदूरों को वापस भेजने की तैयारी शुरू भी कर दी है। केंद्र ने जहां सड़क मार्ग यानी बसों के जरिए मजदूरों को भेजने का आदेश दिया है, वहीं कुछ राज्यों ने मांग की है कि मजदूरों की वापसी के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएं।

वहीं बिहार, पंजाब, तेलंगाना और केरल ने केंद्र सरकार से लोगों को लाने के लिए विशेष ट्रेन चलाने की मांग की। राज्यों ने कहा है कि लोगों की संख्या काफी है। ऐसे में बसों से इन लोगों को घरों तक पहुंचाने में काफी समय लग जाएगा। वहीं, संक्रमण का भी खतरा रहेगा, क्योंकि कई राज्यों से होकर आना होगा।

बिहार में एक आकलन के अनुसार 35 से 40 लाख लोगों को बाहर से लाया जाना है। केंद्रींय गृह मंत्रालय की गाइडलाइन है कि लोगों को विभिन्न प्रदेशों से बसों से लाना होगा। बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संबंध में मंथन किया और पाया कि इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए यह संभव नहीं कि इन्हें बस से लाया जा सके। इसीलिए स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की गई। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी इस आशय का एक ट्वीट भी किया है। पूर्व में भी मुंबई और अन्य जगहों से कोरोना काल में रेलवे ने दो विशेष ट्रेनें चलाई थीं। मुख्यमंत्री के कहने पर उनके ठहराव स्थल तय किए गए थे।

 

प्रवासियों की संख्या के आकलन का आधार लॉकडाउन की वजह से बाहर फंसे प्रवासी बिहारियों के खाते में एक-एक हजार रुपए भेजे जाने की व्यवस्था है। अब तक 28 लाख लोगों ने इसके लिए आवेदन किया है। यह संख्या बढ़ भी सकती है। इसके अलावा चार-पांच लाख विद्यार्थी व अन्य लोग हो सकते हैं। ऐसे में प्रवासी अगर बस से आए तो यह सिलसिला महीनों चल सकता है।इसलिए बस को ना-फिजिकल डिस्टेंसिंग की वजह से सिर्फ 20 लोग आ सकेंगे एक बस में, हजारों बसों को लगाने होंगे कई फेरे -इतनी सारी बसें चलाने के लिए मार्गो में करनी होगी शौचालय और अन्य विशेष व्यवस्थाएं -रास्ते में कौन कहां उतरा, कहां गया इसकी निगरानी होगी मुश्किल, संक्रमण का खतरा बढ़ेगा