Coronavirus & TB: भारत में कोरोना वायरस से ज़्यादा कहर बरपा रही है ये बीमारी!

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नई दिल्ली,  Coronavirus & TB: इस वक्त सारी दुनिया में कोरोना वायरस ने कहर बरपाया हुआ है। पिछले साल दिसंबर में चीन के वुहान शहर से निमोनिया की तरह शुरू हुए इस वायरस ने अभी तक 8 लाख से ज़्यादा लोगों की जानें ले ली है। कोरोना वायरस से बचने के लिए देशों ने कई महीनों लॉकडाउन रखा और उसके बाद सिनेमा हॉल, रेस्तरां, स्कूल, कॉलेज और मॉल्स जैसी जगह आज भी बंद हैं। कोरोना वायरस एक ऐसी ख़तरनाक बीमारी बन गई, जो न सिर्फ आपके शरीर पर अटैक करती है, बल्कि उससे पहले सभी को मानसिक तौर पर अटैक कर रही है। ये वक्त सभी के लिए मुश्किलों से भरा है, खासकर उन लोगों के लिए जिनको सबसे ज़्यादा जोखिम है। यानि बुज़ुर्ग या फिर वे लोग जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

पिछले 8 महीनों से मेडिकल एक्सपर्ट्स और दुनियाभर के वैज्ञानिकों का फोकस सिर्फ कोरोना वायरस के कहर को रोकने पर है। लेकिन, इसका मतलब ये नहीं कि बाकि गंभीर बीमारियों का जोखिम कम हो गया है। कैंसर, डायबिटीज़, दिल की बीमारी, किडनी या फिर टीबी जैसी बीमारियां आज भी हज़ारों-लाखों लोगों की जान ले रही हैं।

इनमें से एक ऐसी बीमारी है, जो तेज़ी से फैल रही है। यहां तक कि कोरोना वायरस से कहीं ख़तरनाक साबित हो रही है। जी हां, ये बीमारी है टीबी यानी ट्यूबरक्लॉसिस। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक़ हर साल दुनिया में रिपोर्ट होने वाले ट्यूबरकुलॉसिस के कुल मामलों में से एक-तिहाई भारत में होते हैं और देश में इस बीमारी से सालाना 480,000 मौतें भी होती हैं।

ट्यूबरक्लॉसिस

ट्यूबरकोलॉसिस एक संक्रामक रोग है। टीबी का बैक्टीरिया सांस से फैलता है। यह छींकने या खांसने पर मुंह से निकले कणों से भी फैलता है। एक समय था जब अपने देश में टीबी लाइलाज बीमारी थी लेकिन अब इसका इलाज संभव है। सही समय पर पूरा इलाज कराने से टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। इसलिए टीबी डायग्नॉज होने पर घबराने की ज़रूरत नहीं है।

भारत में ट्यूबरक्लॉसिस

आंकड़ों को तोड़कर देखें तो स्थिति और भी ख़तरनाक लगती है। सरकार के आकलन के मुताबिक देश में टीबी के चलते रोज़ाना करीब 1,300 मौतें होती हैं। हालांकि भारत पिछले 50 सालों से टीबी की रोकथाम में लगा हुआ है, लेकिन अब भी ये ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करती है।

ये आंकड़े कोरोना वायरस के कहर से पहले के हैं। 2020 में जनवरी के आखिरी हफ्ते के बाद से भारत में कोरोना के मामले बढ़ने शुरू हुए थे और 24 मार्च को देश भर में लॉकडाउन शुरू हुआ था। सरकारी आंकड़ों की तुलना करें तो पता चलता है कि कोरोना वायरस के चलते टीबी के मरीज़ों की रिपोर्टिंग के मामलों में अप्रत्याशित गिरावट आई है और मामले गिर कर लगभग आधे हो गए हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के अलावा बिहार ऐसे राज्य हैं, जहां से टीबी के सबसे ज़्यादा मामले आते हैं। ऐसा ज़ाहिर तौर पर इसलिए हुआ क्योंकि फोकस इस वक्त कोरोना है।

2025 तक हो पाएगा टीबी का ख़ात्मा?

कोविड-19 महामारी के दौरान टीबी के अलावा कई ऐसे मरीज़ हैं, जिनको दवाओं-सुविधाओं में बहुत दिक्क़त हुई, अस्पतालों तक पहुंच नहीं सके। बहुत से ऐसे भी थे जिनका इलाज बीच में ही छूट गया था। अब सामाज में टीबी का कम्यूनिटी स्प्रेड के बढ़ने का डर भी सता रहा है। टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसका समय रहते पता चल जाए, तो इलाज से जल्द ठीक हुआ जा सकता है।

नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2025 तक टीबी को देश से ख़त्म करने का प्रण लिया था, लेकिन अब फोकस टीबी से हटकर कोविड-19 पर शिफ्ट हो गया है। अब उम्मीद है कि अगले साल फिर टीबी पर दोबारा ध्यान देने की कोशिश की जाएगी।

भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। जिसकी वजह से टीबी जैसे दूसरे रोगों के मरीज़ों की भी मुश्किलें बढ़ रही हैं।

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