दिल्ली में काबू में नहीं कोरोना, लॉकडाउन की अवधि बढ़ना तय

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दिल्ली न्यूज़ 24 रिपोर्टर। लॉकडाउन की अवधि कुछ ही दिन में पूरी होने वाली है। अब तक कोरोना काबू में नहीं आया है। दिल्ली में तो लॉकडाउन के दौरान ही संक्रमण तेजी से बढ़ा, जिसमें तब्लीगी जमात की बड़ी भूमिका रही। हालांकि, अब अस्पतालों व सोसायटी में मरीज मिल रहे हैं। इस वजह से कोरोना के इलाज की व्यवस्था के लिए दिल्ली सरकार द्वारा गठित डॉक्टरों की टीम ने भी लॉकडाउन बढ़ाने की बात कही है। ऐसे में दिल्ली में दो से तीन सप्ताह के लिए लॉकडाउन बढ़ना तय है।

पांच सदस्यीय डॉक्टरों की टीम के अध्यक्ष और यकृत व पित्त विज्ञान संस्थान (आइएलबीएस) के निदेशक डॉ एसके सरीन ने कहा कि अभी कोरोना के कंटेनमेंट इलाके बढ़ रहे हैं। पहले तीन इलाके ऐसे थे, जहां संक्रमण अधिक था। सबसे पहले दिलशाद गार्डन में संक्रमण अधिक देखा गया। इसके बाद निजामुद्दीन का तब्लीगी मरकज बड़ा स्पॉट बना। मौजूदा समय में करीब दो दर्जन इलाकों में कंटेनमेंट लागू कर सील किया गया है। आने वाले दिनों में ऐसे इलाके और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि पांच से सात दिन में समुदाय में संक्रमण फैलने का डर है। साथ ही कंटेनमेंट घोषित इलाके के सभी लोगों की स्क्रीनिंग जरूरी है।

बताया जा रहा है कि अगले एक-दो दिन में रैपिड टेस्ट की किट उपलब्ध हो जाएगी। कंटेनमेंट घोषित इलाकों को भी छोटे-छोटे क्लस्टर में बांटकर आसपास के सभी लोगों की जांच होनी चाहिए, क्योंकि संक्रमण बढ़ने की पूरी आशंका है।

वहीं गंगाराम अस्पताल के श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. बॉबी भलोत्रा ने कहा कि यदि 14 अप्रैल के बाद एक-दो दिन लॉकडाउन से छूट भी दी गई तो यहां लोगों में इतना अनुशासन नहीं है कि वे शारीरिक दूरी के नियम का पालन कर सकें। इससे भीड़ बढ़ सकती है, इसलिए लॉकडाउन बढ़ाया जाना चाहिए।

वीटीएम की है कमी, रैपिड टेस्ट से जांच होगी आसान

डॉ. एसके सरीन ने कहा कि आरटी-पीसीआर जांच के लिए मरीज के नाक से स्वैब लेना पड़ता है। स्वैब को लैब में ले जाने के लिए वायरल टेस्ट मीडिया (वीटीएम) की जरूरत पड़ती है। इसकी कमी है। यह आसानी से मिल नहीं रही है। रैपिड जांच के लिए इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। ब्लड सैंपल से आसानी से जांच हो जाएगी। हालांकि, रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर दोबारा आरटी-पीसीआर जांच भी आवश्यक होगी। उन्होंने कहा कि चीन, दक्षिण कोरिया सहित कई देशों में इसका इस्तेमाल किया गया। संक्रमण के सात और 15 दिन बाद तक भी जांच कर सकते हैं। इसमें आइजीएम व आइजीजी दो तरह की जांच होती है।

आइजीएम जांच से यह पता चलता है कि संक्रमण अभी हाल ही में हुआ है। आइजीजी में एंटीबॉडी की जांच होती है। संक्रमित व्यक्ति में आइजीएम नेगेटिव आने के बाद यदि आइजीजी एंटीबॉडी रिपोर्ट भी नेगेटिव आ जाए तो इसका मतलब होगा कि पीड़ि व्यक्ति में प्रतिरोधकता उत्पन्न हो चुकी है।

लॉकडाउन के दूसरे सप्ताह में आए अधिक मामले

दिल्ली में 29 मार्च तक स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में थी। तब तक सिर्फ 72 मामले आए थे। इसमें लॉकडाउन के पहले सप्ताह में 42 नए मामले जुडे़ थे, लेकिन 30 मार्च से तब दिल्ली में परिस्थितियां बदलनी शुरू हुई, जब तब्लीगी जमात का मामला सामने आया। इस वजह से लॉकडाउन के दूसरे सप्ताह में 431 नए मामले आए, जिसमें 320 तब्लीगी जमात के लोग थे। तीसरे सप्ताह में अब तक 217 नए मामले जुड़े, जिसमें 130 जमाती हैं। नौ अप्रैल तक दिल्ली में कुल 720 मामले मिल चुके हैं, जिसमें 430 जमाती व 290 अन्य लोग शामिल हैं। इसके अलावा एक बात यह भी देखी गई कि पहले कोरोना पीडि़तों के संपर्क में आने वाले मरीज कम थे, ऐसे मरीजों की संख्या भी अप्रैल में बढ़ती दिखी। यह बात संक्रमण फैलने का संकेत दे रही है।