China Deflation: चीन में घटती महंगाई का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचा, ‘डिफ्लेशन’ बना खतरे की घंटी

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क्या होता है डिफ्लेशन

डिफ्लेशन (Deflation) एक आर्थिक स्थिति है जिसमें मौद्रिक मानदंड कम होता है. यानी सीधे शब्दों में महंगाई कम होती है. यहां पर मानदंड से मतलब मौद्रिक मूल्य या सामान्य स्तर पर मौद्रिक मूल्य की कमी होना है. अन्य शब्दों में, डिफ्लेशन में मौद्रिक मूल्यों में गिरावट होती है और पैसा की पुर्चाश शक्ति बढ़ती है. डिफ्लेशन के परिणामस्वरूप, व्यापारों की मुनाफा में कमी होती है, उत्पादन में घातक कमी होती है, और बेरोजगारी बढ़ सकती है. यह एक आर्थिक मुद्दा है जिसका सामना करने के लिए सरकारें अनुभव करती हैं, और उन्हें ऐसे समयों में आर्थिक पॉलिसी बनाने और क्रियान्वित करने की जरूरत होती है ताकि आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके.

डिफ्लेशन का कारण कई हो सकते हैं.

1. कमजोर आर्थिक गतिविधियां: यदि एक देश की आर्थिक गतिविधियां कमजोर हैं, तो लोग कम खर्च करते हैं और व्यापार घटता है, जिससे मौद्रिक मूल्यों में कमी हो सकती है.

2. उत्पादन में कमी: उत्पादन में कमी भी एक कारण हो सकती है, क्योंकि इससे बाजार में उपलब्ध आदान-प्रदान कम होता है और वस्त्र, सामान्य वस्त्र, और सेवाओं की मांग में कमी हो सकती है.

3. ब्याज दरों में कमी: यदि ब्याज दरें बहुत उच्च हों, तो लोगों को पैसे उधार लेने का उत्साह हो सकता है और उन्हें खर्च करने के लिए कम पैसे हो सकते हैं, जिससे भी मौद्रिक मूल्यों में कमी हो सकती है.

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