लॉकडाउन में परिवार से जुड़ रहे बच्चे, दादा-दादी से सुन रहे पुराने किस्से और कहानियां.

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नई दिल्ली  वैश्विक माहमारी के संक्रमण से बचाव के लिए सरकार ने लॉकडाउन की सीमा बढ़ा कर 17 मई तक कर दी है। लॉकडाउन के चलते घरों में लोगों की जीवनशैली में बदलाव देखने को मिल रहा है। लॉकडाउन की वजह से परिवार को एक साथ समय गुजारने व एक दूसरे को समय देने का अवसर मिल रहा है। लोग हाथ मिलाने के बदले हाथ जोड़कर प्रणाम या राम-राम बोल रहे हैं। वहीं बच्चे दादा-दादी से कहानियां सुन रहे हैं, मानों घरों में पुरानी परंपरा लौट आई है। घर में बैठे बच्चे टीवी और मोबाइल से पूरी तरह बोर होने के बाद अब कहानियां पढ़ने और सुनने रहे हैं। वक्त से पहले ही बच्चे छुट्टियां मना रहे हैं और नई चीजें सीख परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं।

मौजपुर निवासी पिंकी मंडार खुश है कि उनके बच्चे अपने दादा-दादी और अन्य रिश्तेदारों से हर रोज बात कर पाते हैं, क्योंकि सभी के पास अब पर्याप्त समय है। वो कहती हैं कि हम अब वो सब कुछ कर रहे हैं जिसे हम इतने वक्त से महसूस कर रहे थे। आमतौर पर बड़े-बुजुर्ग अपने बच्चों या पोते-पोतियों से बात करने के लिए तरस जाते हैं। लेकिन लॉकडाउन ने दादा-दादी व पोता-पोती के बीच नजदीकियां बढ़ा दी है।

कहीं दादा-दादी उन्हें रामायण और महाभारत के किस्से कहानियां सुना रहे हैं। तो कहीं मम्मी-पापा से पौराणिक कहानियां सुन रहे हैं। इससे बुजुर्ग दादा-दादी भी बच्चों की बदलती रुचि को देखकर खुश है। वहीं चौधरी अजित सिंह ने बताया कि इस महामारी की वजह से पुराने दिन याद आने लगे है। जब परिवार के सब लोग एक जगह बैठते थे और दादा-दादी व माता-पिता से कहानी किस्से सुनते थे। ऐसा लगता है जैसे पुराना समय एक बार फिर लौट आया है। जब हम भी बच्चे हुआ करते थे।

घरों में खेल कूद से बोर होकर बच्चे अब कुछ समय निकालकर अब अपनी पुरानी किताबे पढ़ रहे हैं, क्योंकि अब सुबह स्कूल नहीं जाना होता हैं। इसलिए देर रात तक बच्चों के साथ कहानी किस्सों का दौर भी खूब चल रहा हैं। इसमें पंचतंत्र की कहानियां, विक्रम बेताल और पौराणिक कहानियां बच्चे पूरे मन से सुन और समझ रहे हैं। कृष्णा देवी ने बताया कि बच्चों को कहानी सुनने की जिद्द करते देख अपना बचपन याद आता हैं।

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