यूनिसेफ के अभियान के तहत अपनी प्रतिभा दिखा रहे दुनियाभर के बच्चे,

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नई दिल्ली  वैश्विक महामारी ने देश-दुनिया के बच्चों के शब्दकोश में नए शब्द जोड़ दिए हैं। उनकी स्मृतियों में वायरस का अच्छा दखल हो गया है, जो उनकी पेंटिंग्स, कार्टून्स व अन्य कलात्मक गतिविधियों में झलक रहा है। इसे देखते हुए यूनिसेफ के डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भी ‘ड्राइंग्स फ्रॉम चिल्ड्रेन इन टाइम्स ऑफ क्राइसिस’ नाम से एक अभियान चला रखा है, जिसमें दुनियाभर के बच्चे अपनी पेंटिंग्स, इलस्ट्रेशन व अन्य आर्ट शेयर कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे कोरे कैनवास पर खुद को अभिव्यक्त कर रहे हैं देश-दुनिया के बच्चे-किशोर और युवा…

दोस्तों, क्या आप थोड़े निराश हैं। तनाव महसूस कर रहे हैं। थोड़ा-थोड़ा गुस्सा भी आ रहा है कि कब इस कोविड-19 का प्रकोप खत्म होगा। सब पहले की तरह सामान्य होगा। तो ऐसा ख्याल आना कतई गलत नहीं है। असल में यह सिर्फ आपके अंदर का डर और बेचैनी है, क्योंकि आपको स्कूल या कॉलेज गए एक अर्सा हो गया है। न दोस्तों से मिलना हो रहा है और न ही रिश्तेदारों के घर जाना। बावजूद इसके, शायद आप में से बहुत से लोग अपने मन की बात को किसी न किसी कला के जरिये अभिव्यक्त कर रहे होंगे। जैसे, हाल ही में अमिताभ बच्चन ने अपने फेसबुक पेज पर पोती आराध्या द्वारा बनाई गई एक पेंटिंग शेयर की थी। आठ साल की आराध्या ने यह पेंटिंग कोरोना वॉरियर्स को समर्पित की थी, जिसमें उन्होंने डॉक्टर्स, नर्स, पुलिस, सफाईकर्मी, टीचर्स, मीडिया पर्सन सभी को इस मुश्किल चुनौती का बेखौफ सामना करने के लिए धन्यवाद दिया था। इस पेंटिंग को सबने खूब सराहा। कैनवास पर बच्चों का यूं अपना भाव प्रकट करना इन दिनों आम हो गया है।

ड्राइंग का वैश्विक अभियान

संयुक्‍त राष्‍ट्र की एक प्रमुख संस्‍था यूनिसेफ के बारे में तो आप सभी जानते ही हैं। इसकी डिजिटल कम्युनिटी ‘वॉयसेज ऑफ यूथ’ ने भी इन दिनों ‘ड्राइंग्स इन द टाइम ऑफ कोरोना’ नाम से एक वैश्विक अभियान चला रखा है, जिसके तहत दुनिया के किसी भी देश के बच्चे-किशोर-युवा (13 से 24वर्ष) अपनी ड्राइंग, पेंटिंग, इलस्ट्रेशन, ब्लॉग, कविताएं आदि उनके प्लेटफॉर्म ( www.voicesofyouth.org) पर शेयर कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें इस प्लेटफॉर्म पर सिर्फ अपना एक अकाउंट क्रिएट करना पड़ेगा। उसके बाद वे अपने क्रिएटिव वर्क अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा, हैशटैग के साथ ट्विटर या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर करने की आजादी है। सभी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। पेंटिंग एवं आर्ट वर्क की थीम भी काफी विविधतापूर्ण होती है। किसी में एक-दूसरे को सहयोग करने का संदेश होता है, तो कोई संकट में विनम्र व दयालु रहने और मन की सेहत का खयाल रखने पर जोर दे रहा होता है।

पेंटिंग में साझा करते अनुभव

‘ड्राइंग्स इन द टाइम ऑफ कोरोना’ कैंपेन में भारत की 22 वर्षीय मालविका मोहन ने भी नर्स को समर्पित एक पेंटिंग भेजी है। वे लिखती हैं, ‘इस समय अपने मन को स्‍थिर रखना आसान नहीं है। लेकिन हम इस सच को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते कि स्वास्थ्यकर्मी कितने समर्पण के साथ अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसे में हमारा फर्ज बनता है उनको सपोर्ट करने का। इसलिए मेरी पेंटिंग की पात्र एक नर्स हैं।‘ इसी प्लेटफॉर्म पर मंगोलिया की बिंदेरिया ने भी एक पेंटिंग साझा की है, जिसमें वह मेडिटेशन के महत्व को दर्शा रही हैं। वह लिखती हैं, ‘इस लॉकडाउन में जब हम कहीं बाहर नहीं जा सकते, तो हमें अपने भीतर झांकने की कोशिश करनी चाहिए, जो मेडिटेशन से संभव है। इससे हम शारीरिक के साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य की भी देखभाल कर पाएंगे।‘

उम्मीद जगाती चित्रकारी

लंदन में रहने वाली प्रत्यूषा श्रीवास्तव चौथी कक्षा में हैं। इन्हें भी रंगों, पेंट्स, स्केच पेन से खासा लगाव रहा है। अभी जब स्कूल बंद हैं, तो वे पेंटिंग में अच्छा समय दे रही हैं। अपने फेसबुक पोस्ट में वे लिखती हैं, ‘मुझे प्रकृति से प्रेम है। उसकी खूबसूरती आकर्षित करती है इसलिए पोस्टर कलर्स की मदद से ‘चेरी ब्लॉसम’ नाम से एक पेंटिंग बनाई है। यह इस बात का संकेत है कि दुख के बादल छट जाएंगे और प्रकृति की तरह सबके चेहरे भी खिल उठेंगे।‘ प्रत्यूषा को इन मुश्किल दिनों में पेंटिंग करने से खुशी और मन की शांति दोनों मिलती है। दुर्गापुर स्थित डीपीएस स्कूल के चौथी कक्षा के स्टूडेंट आर्यन हालदार भी स्केचिंग का शौक रखते हैं। इस लॉकडाउन के दौरान उन्हें ‘इंडिया आर्ट‘ एवं ‘खुला आसमान‘ द्वारा शुरू किए गए आर्ट प्रोजेक्ट ‘आर्ट इन द टाइम ऑफ कोरोना (होप एवं पॉजिटिविटी थ्रू क्रिएटिविटी)‘ की जानकारी मिली और वे इसमें भाग लेने से खुद को रोक नहीं सके। आर्यन ने अपनी पेंटिंग में संकट में घिरी धरती की व्यथा को बयां करने की कोशिश की है।

कोरोना वॉरियर्स को समर्पित आर्ट

इसमें दो मत नहीं है कि बच्चे बेहद खूबसूरती से अपने मन के विचारों को उजागर करने की कला में माहिर होते हैं। आज जब पूरी दुनिया में एक प्रकार की उदासी और घबराहट है, तब वे अपने आसपास के वातावरण को सकारात्मक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने चित्रों से यह संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि एक बुरा समय आया है, जो खत्म हो जाएगा, क्योंकि रात के बाद तो दिन आना ही है। जैसे गाजियाबाद की अनन्या का विश्वास है कि हम सभी मिलकर कोरोना को परास्त कर सकते हैं। यही सोच उनकी पेंटिंग में भी साफ नजर आती है, जिसमें कोरोना वॉरियर्स के साथ एक दीया है, जो इस बात का प्रतीक है कि देश के लाखों-करोड़ों लोगों की शुभकामनाएं इन योद्धाओं के साथ है। वह कहती हैं, ‘हमें विश्वास रखना होगा कि जल्द ही यह वैश्विक महामारी खत्म हो जाएगी और हम फिर से सामान्य जीवन जी पाएंगे।‘

‘ग्लोबल चिल्ड्रेन्स आर्ट प्रोजेक्ट’ की पहल

दोस्तो, हम सभी जानते हैं कि कला यानी आर्ट अभिव्यक्ति का एक खूबसूरत एवं सशक्त माध्यम है। हम दुखी होते हैं, तो कागज पर भी दुख भरी तस्वीरें उकेरते हैं। वहीं, खुश रहने पर पेंटिंग में चटक रंगों का सहज ही समावेश करते हैं यानी आपकी कला के जरिये हर किसी को आपके मनोभावों का आसानी से एहसास हो जाता है। तभी तो आज देश-दुनिया हर जगह प्रयोग किए जा रहे हैं। खासकर बच्चों-किशोरों-युवाओं को प्रेरित किया जा रहा है कि वे कला के जरिये अपने विचारों को सबके सामने रखें। इसी कड़ी में जर्मनी के साप्ताहिक अखबार ‘डाई जीट’ एवं ओस्लो के ‘द इंटरनेशनल म्यूजियम फॉर चिल्ड्रेन्स आर्ट’ ने ‘ग्लोबल चिल्ड्रेन्स आर्ट प्रोजेक्ट’ शुरू किया है। इसमें विश्वभर के बच्चों-युवाओं से अपील की गई है कि वे मौजूदा समय के अपने एहसासों एवं अनुभवों को पेंटिंग के जरिए साझा करें। भविष्य को लेकर उनकी क्या उम्मीदें हैं, किस प्रकार का डर है, यह सब आर्ट में शामिल करें। अगर खुशी के पल मिल रहे हैं, तो उन्हें भी उजागर करें। 31 मई तक बच्चे अपनी पेंटिंग आदि इनकी वेबसाइट

आर्ट वर्क का ऑनलाइन एग्जीबिशन

इंडिया आर्ट की सह संस्थापक मिलिंद साठे ने कहा कि संकट के इस दौर में उम्मीद एवं सकारात्मकता फैलाने के उद्देश्य से इंडिया आर्ट एवं खुला आसमान ने एक वैश्विक कैम्पेन ‘आर्ट इन द टाइम ऑफ कोरोना’ चलाया है, जिसमें दुनियाभर के आर्टिस्ट डूडल, स्केच, ड्राइंग, पेंटिंग, डिजिटल आर्ट, ओरिगेमी, पेपर स्कल्पचर आदि हम से शेयर कर सकते हैं। हां, ये सारे आर्ट वर्क 24 मार्च, 2020 के बाद बनाए गए होने चाहिए। इसलिए हमने काम शुरू करने से लेकर, प्रयोग किए जाने वाले सामानों आदि की तस्वीरें भी मंगाई हैं। अभियान में हिस्सा लेने वालों को अपने आर्ट वर्क, पेंटिंग आदि के साथ ये तस्वीरें भी ईमेल से भेजनी होंगी। इसमें बच्चे, स्टूडेंट्स, आर्टिस्ट्स सभी शामिल हो सकते हैं। एंट्री नि:शुल्क है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद एक स्पेशल ऑनलाइन एग्जीबिशन क्रिएट किया जाएगा, जिसमें कुछ चुनिंदा आर्ट वर्क की प्रदर्शनी होगी। हमारे प्लेटफॉर्म के अलावा, यट्यूब चैनल व वीमियो चैनल पर भी इन्हें शो केस किया जाएगा।

ग्रैफिटी के जरिए जागरूकता

ग्रैफिटी आर्टिस्ट काजल सिंह का कहना है कि घर पर रहना फिलहाल सबसे सुरक्षित विकल्प है हमारे सामने। हम अज्ञानतावश ऐसा कुछ नहीं कर सकते, जिससे खुद के साथ दूसरों का नुकसान हो। आज बिना मतलब बहस या किसी से घृणा करने का भी समय नहीं है, क्योंकि सभी एक ही नाव में सवार हैं। कोई अछूता नहीं है। ग्रैफिटी आर्ट के माध्यम से मैं यही संदेश देना चाहती हूं कि घर पर रहें, सुरक्षित रहें