छत्तीसगढ़ : दंडकारण्य से 63 साल में 51 बार चुने गए 33 रामनामी सांसद-विधायक

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छत्तीसगढ़ : दंडकारण्य से 63 साल में 51 बार चुने गए 33 रामनामी सांसद-विधायक
राम के प्रभाव का यह गहरा प्रमाण ही है कि राम नाम के साथ दंडकारण्य से 33 लोग लोकसभा और विधानसभा पहुंचे हैं।

जगदलपुर  रामायण में जिस दंडकारण्य की चर्चा आती है, वह अरण्य संस्कृति के लिए आज भी समूचे विश्व में प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ में जिस राम वनगमन पथ के विकास की चर्चा है, उसमें दंडकारण्य का भू-भाग भी शामिल है। मुरिया, माड़िया, भतरा, हलबा, धुरवा, दोरला बस्तर की ही नहीं समूचे मध्य भारत की प्रमुख जनजातियों में शुमार हैं। वैसे तो आदिवासियों का देव कुल अलग है, लेकिन हिंदू धर्म का समग्र प्रभाव जनजातीय संस्कृति पर नजर आता है। दंडकारण्य में शामिल बस्तर संभाग में अधिसंख्य आबादी के नाम के साथ राम के नाम का जुडाव इस प्रभाव को प्रमाणित करता है। राम के प्रभाव का यह गहरा प्रमाण ही है कि राम नाम के साथ दंडकारण्य से 33 लोग लोकसभा और विधानसभा पहुंचे हैं। इनके नाम के साथ राम के नाम का जुडाव आदि, मध्य व अंत में रहा है।

1957 से आज तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें से प्रत्येक में बस्तर संभाग की किसी न किसी सीट से ऐसा नेता जरूर चुना गया है जिसके नाम के साथ राम नाम लगा रहा है। 1957 में दंतेवाडा से शिवराम व केशकाल से सरादुराम कांग्रेस की टिकट पर विधायक चुने गए थे। 1962 में तीन, 1967 में एक, 1972 में छह, 1977 में पांच, 1980 में चार, 1985 में पांच, 1990 में पांच, 1993 में छह, 1998 में तीन, 2003 में तीन, 2008 में चार, 2013 में एक तो 2018 में दो विधायक ऐसे थे, जिनके नाम के साथ राम का नाम जुडाव था। राम के नाम का सहारा भाजपा, कांग्रेस, सीपीआइ समेत निर्दलीयों को भी मिला है। बस्तर संभाग के सात जिलों में विधानसभा की 12 सीटें हैं।

22 को पांच साल बाद मिला वनवास

बस्तर में बलीराम कश्यप भाजपा तो मनकूराम सोडी कांग्रेस के मुख्य चेहरे रहे हैं। चार-पांच दशक तक दोनों पार्टियों की राजनीति बस्तर में इनके ही इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। संभाग की सीटों पर पार्टी के टिकट का निर्धारण यही करते थे। 1972 में पहली बार भारतीय जनसंघ की टिकट से जगदलपुर से विधायक चुने जाने वाले बलीराम कश्यप ने पांच बार विधानसभा तो चार बार लोकसभा के चुनाव जीते हैं। वहीं मनकूराम सोडी पहली बार 1962 में केशकाल से निर्दलीय विधायक बने थे।

इसके बाद वे चार बार विधायक तो तीन बार सांसद बने। यह दोनों राम नाम के साथ विधानसभा ही नहीं लोकसभा चुनाव में भी 1984 से 2009 तक जीतते रहे हैं। कांग्रेेस के झितरूराम बघेल चार तो भुरसूराम नाग तीन बार विधायक चुने गए हैं। बस्तर के नौ नेता राम के नाम के साथ दो-दो बार विधायक चुने गए हैं। इनमें से कई वर्तमान में सक्रिय हैं। राम के नाम के साथ विधानसभा पहुंचने वाले दंडकारण्य के 22 नेताओं को पहली बार चुने जाने के बाद वनवास भी जाना पडा है। यह या तो दोबारा चुनाव नहीं जीते या फिर पार्टियों ने इन्हें टिकट ही नहीं दिया।

राम वन गमन पथ में कई स्थान

बस्तर संभाग के अनेक स्थानों के साथ राम के जुडाव के किस्से प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि वनवास काल में बस्तर में समय व्यतीत करने के साथ इस मार्ग से होकर राम भगवान गुजरे थे। यही कारण है कि राम वनगमन पथ के विकास का जो खाका खींचा गया है, उसमें बस्तर के अनेक स्थानों को शामिल किया गया है। इनमें केशकाल, चित्रकोट, रामाराम शामिल हैं।