चंद्रयान-3 की लैंडिंग का live Streaming देखेंगे विश्वविद्यालय के छात्र, UGC ने जारी किया डायरे्क्ट लिंक

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Live landing of Chandrayaan-3 on the Moon: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) को 23 अगस्त को भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान 3 की लैंडिंग के लिए विशेष सभाएं आयोजित करने और लाइव स्ट्रीम क्षणों का आयोजन करने का निर्देश दिया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अनुसार, चंद्रयान -3 23 अगस्त को शाम लगभग 6:04 बजे चंद्रमा पर उतरने का कार्यक्रम है. चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

चंद्रयान-3 का चंद्रमा पर लैंडिंग का लाइव वेबकास्ट

आयोग ने कॉलेजों और संस्थानों को सलाह दी है कि वे छात्रों के साथ-साथ संकाय सदस्यों को भी चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग का लाइव वेबकास्ट देखने के लिए प्रोत्साहित करें.

यूजीसी ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग को बताया यादगार अवसर

भारत के चंद्रयान-3 की लैंडिंग एक यादगार अवसर है जो न केवल जिज्ञासा को बढ़ावा देगा बल्कि हमारे युवाओं के मन में अन्वेषण के लिए एक जुनून भी जगाएगा. इससे गर्व और एकता की गहरी भावना पैदा होगी क्योंकि हम सामूहिक रूप से भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शक्ति का जश्न मनाएंगे. यह वैज्ञानिक जांच और नवाचार के माहौल को बढ़ावा देने में योगदान देगा.

विशेष सभा का आयोजित

उच्च शिक्षा संस्थानों से अनुरोध है कि वे शाम 5.30 बजे से शाम 6.30 बजे तक विशेष सभाएं आयोजित करें और इस महत्वपूर्ण अवसर का गवाह बनने के लिए चंद्रमा पर चंद्रयान -3 के उतरने की लाइव स्ट्रीमिंग देखें. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस महत्वपूर्ण अवसर का गवाह बनने के लिए देश के साथ शामिल होंगे.

ये है डायरेक्ट लिंक

नोटिस के मुताबिक, भारत के चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान की चंद्रमा पर लैंडिंग शाम 5:27 बजे से लाइव स्ट्रीम की जाएगी. कल (23 अगस्त), कई प्लेटफार्मों पर लाइव कवरेज उपलब्ध है।. इसरो की वेबसाइट, isro.gov.in, इसरो का आधिकारिक यूट्यूब चैनल (ISRO आधिकारिक), इसरो का फेसबुक पेज, https://www.facebook.com/ISRO, और डीडी नेशनल टीवी स्टेशन आउटलेट्स में से हैं.

कल चंद्रमा पर उतरेगा चंद्रयान-3

आयोग के अनुसार, चंद्रयान-3 मिशन, जो कल चंद्रमा पर उतरने वाला है, भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और उद्योग के लिए एक बड़ा कदम होगा. इस बीच, चंद्रयान -3 का लैंडर मॉड्यूल, जिसमें लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान शामिल हैं, चंद्रमा के चारों ओर आवश्यक चक्कर लगाने और डीबूस्टिंग युद्धाभ्यास को पूरा करने के बाद लैंडिंग के लिए ‘आदर्श स्थान’ की तलाश कर रहे हैं.

बेहद निर्णायक होंगे अंतिम 15 मिनट

  • सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान अंतिम 15 मिनट बेहद निर्णायक होंगे. पूरे चंद्र मिशन की सफलता इन्हीं 15 मिनटों पर निर्भर है. गति नियंत्रण करने से लेकर लैंडर को संभालने का काम इसी दौरान होगा.

  • 400 मीटर की ऊंचाई से लैंडर मॉड्यूल चंद्रमा की सतह का मुआयना करेगा, 1680 मीटर प्रति सेकेंड से घट कर दो मीटर प्रति सेकेंड होगी इस समय स्पीड

  • अगले कुछ सेकेंडों में लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह से करीब 100 मीटर ऊपर होगा और उतरने के लिए उपयुक्त जगह की तलाश करेगा

  • जैसे ही लैंडर मॉड्यूल के चारों पैर चंद्रमा की सतह को छू लेंगे, मॉड्यूल में लगा सेंसर इंजन को बंद करने के लिए संकेत भेजेगा, अध्ययन की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी

  • सॉफ्ट लैंडिंग के बाद लैंडर विक्रम सतह की पहली तस्वीर के साथ संदेश भी भेजेगा

  • कुछ घंटे बाद लैंडर विक्रम से बाहर आयेगा रोवर प्रज्ञान, चंद्रमा की सतह का अध्ययन शुरू करेगा

  • चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर और चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल के बीच दो तरफा संचार संपर्क स्थापित किया गया

  • 18 अगस्त विक्रम लैंडर सफल डिबूस्टिंग प्रक्रिया से गुजरा

  • 20 अगस्त दूसरी बार डिबूस्टिंग प्रक्रिया पूरी कर चांद के काफी करीब पहुंचा लैंडर

  • रोवर प्रज्ञान लैंडर को भेजेगा चंद्रमा की सतह से एकत्र किया गया डेटा

  • लैंडर विक्रम इस डेटा को इसरो को करेगा ट्रांसफर, जिससे खुलेंगे कई राज

  • रोवर प्रज्ञान लैंडर को भेजेगा चंद्रमा की सतह से एकत्र किया गया डेटा

  • 23 अगस्त शाम छह बज कर चार मिनट पर विक्रम लैंडर उतरेगा चंद्रमा की सतह पर

  • लैंडिंग के बाद रोवर रैँप से बाहर निकलेगा और 14 दिनों तक चंद्रमा की सतह का करेगा विस्तृत अध्ययन

23 अगस्त को ही लैंडिंग क्यों

चंद्रमा पर 14 दिनों का दिन और 14 दिनों का रात होता है. अभी चंद्रमा पर रात है और 23 तारीख को सूर्योदय होगा. लैंडर विक्रम व रोवर प्रज्ञान दोनों सोलर पैनल के इस्तेमाल से ऊर्जा प्राप्त कर सकेंगे.

कैसी है तैयारी

लैंडर की रफ्तार से निबटने के लिए चंद्रयान-3 में वो सारी तैयारी की गयीं हैं जिससे इसे आसानी से उतार कर भेजने का मकसद हासिल किया जा सके. इस सबके लिए नयी तकनीक भी विकसित की गयी है.

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