केंद्र की 411 परियोजना समय से पूरी नहीं होने के कारण लागत में हुआ 4.52 लाख करोड़ का इजाफा

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केंद्र सरकार 150 करोड़ रुपये और उससे अधिक राशि की 1788 परियोजनाओं की निगरानी कर रही है. इन योजनाओं की मूल लागत 2478446 लाख करोड़ और अनुमानित लागत 2909526 करोड़ आंकी गयी थी. लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी के कारण इसकी लागत में लगभग 4.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ी है.

837 परियोजनाओं में देरी के कारण लागत में 3.39 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी

सरकार की 1788 परियोजनाओं में से 411 परियोजनाओं की लागत 4.52 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ी है, जबकि ऐसे परियोजना की मूल लागत 6.95 लाख करोड़ और अनुमानित लागत 11.47 लाख करोड़ आंकी गयी थी. केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार 837 परियोजनाओं में देरी के कारण लागत में 3.39 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई, जबकि इन परियोजनाओं की मूल लागत 13.61 लाख करोड़ रुपये और अनुमानित लागत 17 लाख करोड़ थी. लंबित 837 परियोजनाओं में से 330 परियोजनाएं तीन साल से अधिक समय से लंबित हैं.

जल संसाधन विभाग में लंबित होने के कारण परियोजना की लागत 46234 करोड़ से अधिक

मंत्रालय के अनुसार जल संसाधन विभाग में लंबित होने के कारण परियोजना की लागत 46234 करोड़ से अधिक की हो गयी है. जल संसाधन विभाग की 41 परियोजनाओं में मूल लागत 23466.28 करोड़ है, जबकि अनुमानित लागत 69,700 करोड़ है. समय से परियोजना पूरी न होने के कारण रेलवे की परियोजनाओं में लागत बढ़ी है. रेलवे में 247 प्रोजेक्ट में मूल लागत 404609 लाख करोड़ रुपये और अनुमानित लागत 614279.6 लाख करोड़ है. लेकिन देरी के कारण इसमें 2.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ है. राज्यसभा में भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में यह जानकारी केंद्रीय सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन और योजना मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने दी.

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